भारतीय पैरा शूटर मनीष नरवाल ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीत लिया है। जापान के नागोया में आयोजित प्रतियोगिता में उन्होंने पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच1 स्पर्धा के फाइनल में 233.7 अंक हासिल किए। वह दूसरे स्थान पर रहे। दक्षिण कोरिया के जो जियोंगदू ने गोल्ड मेडल जीता, जबकि चीन के यांग चाओ को कांस्य पदक मिला। इस उपलब्धि के साथ मनीष ने लॉस एंजिल्स में होने वाले 2028 पैरालंपिक खेलों का कोटा भी हासिल कर लिया। इससे पहले उन्होंने 2023 के हांगझोऊ एशियन पैरा गेम्स में भी रजत पदक जीता था।
बचपन में फुटबॉलर बनना चाहते थे
हर खिलाड़ी का सफर आसान नहीं होता। मनीष नरवाल की कहानी भी संघर्ष और मेहनत से भरी है। उनका दाहिना हाथ जन्म से ही पूरी तरह काम नहीं करता। बचपन में जब उन्हें एहसास हुआ कि वह दूसरे बच्चों से अलग हैं, तो वह परेशान रहने लगे थे। खबर के मुताबिक, वह लोगों के सामने आने से भी डरते थे। मनीष का सपना निशानेबाज बनने का नहीं, बल्कि फुटबॉलर बनने का था। वह फुटबॉल खेलना चाहते थे, लेकिन परिस्थितियों के कारण उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका। इसके बाद उनकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने उन्हें देश के बड़े पैरा शूटरों में शामिल कर दिया।
पिता ने उधार लेकर खरीदी पिस्टल
मनीष के पिता दिलबाग सिंह ने बेटे को आगे बढ़ाने के लिए काफी मेहनत की। उन्होंने एक दोस्त की मदद से मनीष का दाखिला बल्लभगढ़ की एक शूटिंग अकादमी में कराया। शूटिंग के लिए पिस्टल खरीदना परिवार के लिए आसान नहीं था। रिपोर्ट के मुताबिक, मनीष के पिता को पिस्टल खरीदने के लिए रिश्तेदारों से कर्ज लेना पड़ा। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही पिस्टल आगे चलकर मनीष की पहचान बन जाएगी। पिता का भरोसा और परिवार का साथ उनके खेल करियर की शुरुआत में अहम साबित हुआ।
शूटिंग पसंद नहीं थी, फिर बदली सोच
शुरुआत में मनीष को शूटिंग बिल्कुल पसंद नहीं थी। उनका मन फुटबॉल में लगता था, लेकिन कोच प्रकाश नौटियाल ने उनकी प्रतिभा को पहचानने और निखारने में मदद की। धीरे-धीरे मनीष का निशानेबाजी में मन लगने लगा। उन्होंने अभ्यास जारी रखा और प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन किया। समय के साथ उन्होंने अपनी कमजोरी को अपनी पहचान के रास्ते की बाधा नहीं बनने दिया। आज एशियन पैरा गेम्स में पदक जीतकर उन्होंने अपने परिवार के संघर्ष और भरोसे को एक बड़ी उपलब्धि में बदल दिया है।
पावरलिफ्टिंग में अशोक ने जीता सिल्वर
एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत को पावरलिफ्टिंग में भी पदक मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, अशोक ने पुरुषों की 65 किलोग्राम श्रेणी में 192 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया। उन्होंने आखिरी प्रयास में 201 किलोग्राम उठाने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके। इसके बावजूद उनका प्रदर्शन शानदार रहा। भारतीय खिलाड़ियों की इन उपलब्धियों से प्रतियोगिता में देश का प्रदर्शन मजबूत हुआ है। पैरा खेलों में खिलाड़ी लगातार मेहनत और लगन के दम पर अपनी पहचान बना रहे हैं।
भाला फेंक में भी भारत को दो पदक
भाला फेंक स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने पदक जीते। प्रदीप कुमार ने पुरुषों की एफ53/एफ54 स्पर्धा में 27.45 मीटर का थ्रो करके सिल्वर मेडल हासिल किया। यह एशियन पैरा गेम्स में उनका लगातार दूसरा रजत पदक बताया गया है। वहीं, आयुष वर्मा ने एफ53 श्रेणी में 17.88 मीटर का थ्रो करके कांस्य पदक जीता। मनीष नरवाल, अशोक, प्रदीप कुमार और आयुष वर्मा की उपलब्धियां भारतीय पैरा खिलाड़ियों की मेहनत और क्षमता को सामने लाती हैं। मनीष के लिए यह पदक खास है, क्योंकि इसके साथ उन्होंने 2028 पैरालंपिक का कोटा भी हासिल किया है।