Manpreet Kaur Asian Games Medal : एशियन गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स को एक और बड़ी सफलता मिली, जब अनुभवी शॉट पुट खिलाड़ी मनप्रीत कौर ने कांस्य पदक अपने नाम किया। इस उपलब्धि के साथ वह एशियन गेम्स के महिला शॉट पुट में पदक जीतने वाली भारत की चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गईं। उनकी यह सफलता सिर्फ एक मेडल नहीं, बल्कि संघर्ष और वापसी की मिसाल भी है।
कम उम्र में झेली जिंदगी की कठिनाइयां
पंजाब के पटियाला में किसान परिवार में जन्मी मनप्रीत कौर का सफर आसान नहीं रहा। बचपन में ही खेलों के प्रति उनका झुकाव था, लेकिन 13 साल की उम्र में पिता का निधन हो गया। इसके कुछ साल बाद उनकी मां लकवे की शिकार हो गईं। परिवार की जिम्मेदारियों और मुश्किल हालात के बावजूद उन्होंने अपने खेल का सपना नहीं छोड़ा।
स्प्रिंट से शॉट पुट तक का सफर
शुरुआत में मनप्रीत दौड़ प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती थीं, लेकिन बाद में उन्होंने शॉट पुट को अपना मुख्य खेल बनाया। लगातार मेहनत का नतीजा यह रहा कि उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई और कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए। 2016 ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाली वह भारत की प्रमुख महिला शॉट पुट खिलाड़ियों में शामिल रहीं।
करियर का सबसे बड़ा झटका
साल 2017 मनप्रीत के लिए शानदार भी था और दर्दनाक भी। एक तरफ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर डोपिंग जांच में विफल रहने के कारण उन पर चार साल का प्रतिबंध लगा दिया गया। इस फैसले के बाद उनके रिकॉर्ड और पदक भी रद्द कर दिए गए। लंबे समय तक खेल से दूर रहना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ा झटका होता है।
हार नहीं मानी, फिर शुरू किया सफर
चार साल के प्रतिबंध के दौरान मनप्रीत को कई आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने खेल छोड़ने का फैसला नहीं किया। प्रतिबंध खत्म होने के बाद उन्होंने दोबारा मैदान पर वापसी की और खुद को साबित करने के लिए कड़ी मेहनत शुरू कर दी। उनकी वापसी ने दिखाया कि मुश्किल दौर के बाद भी नए सिरे से शुरुआत की जा सकती है।
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एशियन गेम्स में मिला संघर्ष का इनाम
2026 एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतकर मनप्रीत कौर ने अपने लंबे संघर्ष को नई पहचान दी। 36 साल की उम्र में पोडियम पर पहुंचना और तिरंगे के लिए पदक जीतना उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। यह कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि हौसले, धैर्य और लगातार प्रयास की भी मिसाल बन गई है।