भारतीय शूटिंग संघ की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में डबल ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर शामिल हुईं। यहां शूटिंग से जुड़े बड़े ऐलान और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा हो रही थी। लेकिन इसी दौरान माहौल तब बदल गया जब मीडिया ने उनसे युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी को लेकर सवाल पूछ लिया। इस एक सवाल ने खेल जगत में नई बहस को जन्म दे दिया।
मनु भाकर का संतुलित जवाब
सवाल के जवाब में मनु भाकर ने बेहद संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर वैभव सूर्यवंशी को सही मेंटरशिप और अच्छा माहौल मिलता है, तो उम्र कोई मायने नहीं रखती। उनके मुताबिक सही मार्गदर्शन मिलने पर वह भारतीय खेलों के अगले बड़े सितारे बन सकते हैं। उनका यह बयान सकारात्मक था, लेकिन इसके बावजूद विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।
सोशल मीडिया पर नाराजगी
इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि एक ओलंपिक मेडलिस्ट से शूटिंग इवेंट के दौरान क्रिकेटर पर सवाल क्यों पूछा गया। लोगों का कहना है कि भारत में क्रिकेट को जरूरत से ज्यादा तवज्जो मिलती है, जिससे बाकी खेलों के खिलाड़ी अक्सर पीछे छूट जाते हैं। इस बहस ने फिर से खेलों के बीच असमानता के मुद्दे को सामने ला दिया है।
जय भट्टाचार्या का कड़ा बयान
इस विवाद पर जय भट्टाचार्या ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एक ओलंपिक पदक विजेता से किसी दूसरे खेल के खिलाड़ी पर सवाल करना उनकी उपलब्धियों के साथ नाइंसाफी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि क्रिकेट पहले से ही देश का सबसे लोकप्रिय खेल है, ऐसे में उसे प्रमोट करने के लिए दूसरे खिलाड़ियों के नाम का सहारा लेना सही नहीं है।
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मनु भाकर की ऐतिहासिक उपलब्धि
मनु भाकर भारत की पहली ऐसी शूटर हैं जिन्होंने एक ही ओलंपिक में दो पदक जीते। उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल और मिक्स्ड टीम इवेंट में कांस्य पदक हासिल कर इतिहास रचा। उनकी यह उपलब्धि भारतीय शूटिंग के लिए गर्व का क्षण रही है और उन्हें देशभर में सम्मान मिला है। यही वजह है कि उनके साथ इस तरह के सवाल को लेकर लोगों की नाराजगी और बढ़ गई।
बहस ने उठाए बड़े सवाल
यह पूरा मामला सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय खेल संस्कृति पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। एक तरफ उभरते क्रिकेट सितारे हैं, तो दूसरी तरफ ओलंपिक में देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ी। इस घटना ने दिखा दिया कि खेलों के बीच संतुलन और सम्मान बनाए रखना कितना जरूरी है, ताकि हर खिलाड़ी को उसकी मेहनत के मुताबिक पहचान मिल सके और भविष्य में ऐसे विवाद दोबारा न हों।