प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माओवादी आतंकवाद से प्रभावित इलाकों में शांति और विकास की उम्मीद जताते हुए कहा कि वे उन माताओं के दर्द को भली-भांति समझते हैं, जिन्होंने अपने बेटों को इस हिंसा में खो दिया है। पीएम ने विश्वास व्यक्त किया कि गरीब और आदिवासी परिवारों की इन माताओं के आशीर्वाद से भारत जल्द ही माओवादी आतंक से पूरी तरह मुक्त होगा। उनका यह भावनात्मक संदेश देश के उन हिस्सों में नई उम्मीद लेकर आया है, जो वर्षों से हिंसा की चपेट में रहे हैं।
माओवादी आतंक के खिलाफ सरकार की प्रतिबद्धता
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि माओवादी हिंसा सिर्फ विकास की राह में रुकावट नहीं, बल्कि देश की एकता पर भी हमला है। केंद्र सरकार ने पिछले एक दशक में कई ऐसे कदम उठाए हैं, जिनसे नक्सल प्रभावित जिलों में सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों का निर्माण हुआ है। सुरक्षा बलों की कार्रवाई और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की पहल ने हाल के वर्षों में इस समस्या को काफी हद तक कमजोर किया है।
आदिवासी समाज के प्रति संवेदना और विश्वास
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि माओवादी हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित वही आदिवासी समाज रहा है, जिसे बरगलाकर हिंसा की राह पर ले जाया गया। उन्होंने इस वर्ग के विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़े कई कार्यक्रमों की जानकारी दी। उनका कहना था कि “अब समय है कि हमारे आदिवासी भाई-बहन हथियार नहीं, शिक्षा और विकास को अपना साथी बनाएं।”
‘शांति का भारत’ बनाने का संकल्प
प्रधानमंत्री ने अंत में कहा कि देश को उस दिशा में ले जाना है जहां किसी मां की गोद फिर से उजड़ न सके। उन्होंने शहीद जवानों के परिवारों को नमन करते हुए भरोसा दिलाया कि उनकी कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी। आने वाले वर्षों में भारत माओवादी आतंक से पूरी तरह मुक्त होगा — यही हर भारतीय का संकल्प है।