Marco Rubio India Visit : अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत दौरे के बीच अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। रुबियो ने कहा है कि दुनिया के किसी भी देश के साथ अमेरिका के रिश्ते भारत के साथ उसके संबंधों की कीमत पर नहीं होंगे। उनके इस बयान को ऐसे समय अहम माना जा रहा है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते संपर्कों पर चर्चा हो रही है। रुबियो ने भारत के साथ व्यापार समझौते और दोनों देशों के बीच जारी बातचीत को भी अहम बताया।
जयशंकर से मुलाकात में अहम मुद्दों पर चर्चा
मार्को रुबियो भारत के दो दिवसीय दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत की। भारत और अमेरिका के रिश्ते लंबे समय से व्यापार, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग जैसे विषयों पर आगे बढ़ रहे हैं। रुबियो ने अपने बयान में संकेत दिया कि वाशिंगटन भारत के साथ संबंधों को किसी तीसरे देश के साथ अपने रिश्तों के नजरिए से नहीं देखता। ऐसे में उनके दौरे पर दोनों देशों के बीच सहयोग को लेकर खास नजर बनी हुई है।
निक्सन-किसिंजर दौर से तुलना पर जवाब
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को दिए इंटरव्यू में रुबियो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति की तुलना 1970 के दशक के रिचर्ड निक्सन और हेनरी किसिंजर के दौर से करने पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि उस समय की वैश्विक व्यवस्था आज से काफी अलग थी। शीत युद्ध के दौरान अमेरिका की दक्षिण एशिया नीति में पाकिस्तान की अहम भूमिका थी। रुबियो के मुताबिक, उस दौर की परिस्थितियों को आज के हालात से सीधे जोड़कर देखना सही नहीं होगा। उनका बयान अमेरिका की मौजूदा विदेश नीति को पुराने उदाहरणों से अलग समझने का संकेत देता है।
पाकिस्तान से संबंधों पर क्या बोले रुबियो?
पाकिस्तान और वहां के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ ट्रंप प्रशासन के बढ़ते संपर्कों पर सवाल पूछे जाने पर रुबियो ने कहा कि अमेरिका के पाकिस्तान के साथ संबंध होना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि इन रिश्तों का उद्देश्य सकारात्मक कामों में मदद करना हो सकता है। रुबियो के मुताबिक, वाशिंगटन अपने प्रभाव का इस्तेमाल ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए कर सकता है, जिनसे क्षेत्र में तनाव या संघर्ष पैदा होने की आशंका हो। हालांकि, उन्होंने यह दावा नहीं किया कि अमेरिका के प्रयासों से सभी क्षेत्रीय चिंताएं खत्म हो जाएंगी।
भारत की चिंताओं को दूर करने की कोशिश
रुबियो ने कहा कि पाकिस्तान के साथ अमेरिका के संबंध भारत के साथ उसके रिश्तों को कमजोर करने के लिए नहीं हैं। उन्होंने भारत के साथ व्यापार समझौते की दिशा में काम करने और दोनों देशों के बीच हुई बातचीत को इस प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया। उनके बयान का एक अहम संदेश यह है कि अमेरिका भारत और पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को अलग-अलग आधार पर आगे बढ़ाना चाहता है। भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े सवालों पर दोनों देशों के बीच बातचीत आगे भी अहम रहेगी।
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भारत-अमेरिका संबंधों पर रहेंगी नजरें
मार्को रुबियो के बयान के बाद अब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते, सुरक्षा सहयोग और क्षेत्रीय मुद्दों पर आगे की बातचीत महत्वपूर्ण होगी। अमेरिका एक ओर भारत के साथ रणनीतिक संबंध मजबूत करने की बात कर रहा है, वहीं पाकिस्तान के साथ भी संपर्क बनाए रखना चाहता है। रुबियो का कहना है कि दोनों रिश्तों को एक-दूसरे की कीमत पर नहीं देखा जाना चाहिए। अब यह देखना अहम होगा कि यह रुख आने वाले समय में दोनों देशों के बीच होने वाले फैसलों और सहयोग में किस तरह दिखाई देता है।