Margashirsha Purnima 2025: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को अत्यंत शुभ और दिव्य माना गया है, और मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा को विशेष रूप से लक्ष्मी कृपा प्राप्त करने वाली तिथि बताई गई है। कहा जाता है कि इस दिन किए गए पूजन, व्रत और दान से अनेक प्रकार की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर लाल बाती का दीपक जलाने की परंपरा भी वर्षों से चली आ रही है। मान्यता है कि यह उपाय धन, सौभाग्य और मानसिक शांति का मार्ग खोल देता है। आइए जानते हैं इस विशेष तिथि पर लाल बाती का दीपक जलाने का महत्व और लाभ।
लाल बाती का दीपक क्यों जलाया जाता है?
मार्गशीर्ष माह को श्रीकृष्ण का प्रिय और अत्यंत शुभ महीना कहा गया है। वहीं पूर्णिमा स्वयं में ही चंद्रमा की पूर्ण ऊर्जा का प्रतीक है। लाल रंग को ऊर्जा, शक्ति और आकर्षण का रंग माना गया है। जब पूर्णिमा की रात्रि में लाल बाती का दीपक जलाया जाता है, तो यह सकारात्मक ऊर्जा को सक्रिय करता है और नकारात्मकता को दूर करता है। यह दीपक देवी लक्ष्मी को भी अत्यंत प्रिय माना जाता है, इसलिए इसे समृद्धि की प्राप्ति का माना गया एक शक्तिशाली उपाय समझा जाता है।
लाल बाती का दीपक जलाने के फायदे
पहली और सबसे महत्वपूर्ण मान्यता यह है कि मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर यह दीपक जलाने से घर में धन की वृद्धि होती है और आर्थिक बाधाएँ दूर होती हैं। ऐसा कहा जाता है कि लाल कपास की बाती और देसी घी का संयोजन वातावरण में दिव्य कंपन उत्पन्न करता है, जो मानसिक शांति और आध्यात्मिक उत्थान प्रदान करता है। इसके अलावा, यह उपाय गृहकलह, नेगेटिविटी और अचानक आने वाली परेशानियों को भी कम करने में सहायक माना गया है। नियमित रूप से पूर्णिमा पर यह दीपक जलाने से सौभाग्य स्थायी रूप से बढ़ता है।
कैसे जलाएँ लाल बाती का दीपक?
इस उपाय का सर्वोत्तम लाभ पाने के लिए मार्गशीर्ष पूर्णिमा की शाम या चंद्र उदय के समय पूजा स्थान में दीपक जलाया जाता है। इसके लिए लाल रंग की कपास की बाती, देसी घी और पीतल या मिट्टी का दीपक प्रयोग करना शुभ माना जाता है। दीपक जलाते समय लक्ष्मी–नारायण का ध्यान करें और मन ही मन अपनी मनोकामनाएँ व्यक्त करें। माना जाता है कि सच्ची श्रद्धा के साथ किया गया यह उपाय शीघ्र ही फल देता है।