चार देशों की लंबी यात्रा कर ‘मारीच’ नाम का गिद्ध एक बार फिर हिंदुस्तान लौट आया है। घायल अवस्था में मिला यह गिद्ध उपचार के बाद विदिशा-रायसेन सीमा पर हलाली डैम के पास छोड़ा गया था। उस पर सोलर सिस्टम से चलने वाला सैटेलाइट कॉलर लगाया गया था, जिसके जरिए उसकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी। मारीच ने 15 हजार किलोमीटर का रोमांचक सफर तय करते हुए पाकिस्तान, अफगानिस्तान, उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान की सीमाएं पार कीं और फिर भारत लौट आया।
सैटेलाइट कॉलर से ट्रैक हुआ ‘मारीच’ का सफर
मारीच गिद्ध पर लगाया गया सौर ऊर्जा से चलने वाला जीपीएस कॉलर उसकी यात्रा की हर लोकेशन भेजता रहा। इस तकनीक की मदद से उसके उड़ान पैटर्न, विश्राम स्थल और प्रवासी व्यवहार का लगातार अध्ययन किया गया।
घायल मिलने के बाद हुआ उपचार
गिद्ध ‘मारीच’ को स्थानीय लोगों ने घायल अवस्था में पाया था। विभागीय टीम ने उसका इलाज किया और पूरी तरह स्वस्थ होने पर उसे मार्च 2025 में प्राकृतिक आवास में स्वतंत्र उड़ान भरने के लिए छोड़ा गया।
चार देशों का चक्कर लगाकर लौटा भारत
मारीच ने भारत से उड़ान भरते हुए सबसे पहले पाकिस्तान की सीमा पार की। इसके बाद वह अफगानिस्तान, उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान पहुंचा। करीब 15 हजार किलोमीटर का यह प्रवासी चक्र पूरा कर गिद्ध दोबारा भारत लौट आया।
विदिशा-रायसेन सीमा से छोड़ा गया था गिद्ध
मारीच को हलाली डैम क्षेत्र से मुक्त उड़ान के लिए छोड़ा गया था। यह इलाका गिद्धों के लिए सुरक्षित आवास माना जाता है, जहां भोजन और प्राकृतिक आवास दोनों पर्याप्त हैं।
अध्ययन के लिए बनेगा महत्वपूर्ण डेटा
मारीच की यात्रा से प्राप्त जानकारी गिद्ध संरक्षण और माइग्रेशन पैटर्न समझने में बेहद उपयोगी साबित होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सैटेलाइट ट्रैकिंग प्रोजेक्ट भविष्य में दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण में अहम भूमिका निभाएंगे।