भारतीय शादियों में बदलते दौर के साथ कुंडली मिलान की परंपरा पीछे छूटती जा रही है। अब माता-पिता और युवतियां जीवनसाथी चुनते समय ग्रह-दशा से ज्यादा आर्थिक स्थिरता, हेल्थ फिटनेस और सिविल स्कोर को प्राथमिकता दे रहे हैं। हाल ही के मामलों से संकेत मिलता है कि कर्ज में डूबा या स्वास्थ्य समस्याओं से घिरा दूल्हा रिश्तों में दरार का कारण बन रहा है, इसलिए रिश्ता तय करने से पहले पूरी जांच जरूरी समझी जा रही है।
कुंडली से आगे बढ़ा आधुनिक सोच का ट्रेंड
पहले विवाह तय करने में कुंडली मिलान ही सबसे महत्वपूर्ण माना जाता था, लेकिन अब मांगलिक दोष या राहु-केतु की गणना पर परिवार कम निर्भर हो रहे हैं। बदलते सामाजिक माहौल में लड़कियां जीवन साथी का चयन करते समय उनकी फिटनेस, आर्थिक स्थिति और जीवनशैली को अधिक महत्व दे रही हैं।
हेल्थ रिपोर्ट छिपी तो रिश्ते टूटने लगे
एक मामले में शादी के बाद पत्नी को पता चला कि पति गंभीर बीमारी से पीड़ित है, जिसके बाद उसने तलाक की अर्जी दे दी। स्वास्थ्य संबंधी जानकारी छिपाना अब रिश्तों में सबसे बड़ी दिक्कतों में से एक बनकर सामने आ रहा है।
कर्ज छिपाया तो बनी बड़ी समस्या
एक अन्य मामले में पति ने शादी से पहले अपने ऊपर चल रहे कर्ज की जानकारी नहीं दी। सालों तक कर्ज के दबाव और झगड़ों के बाद पत्नी ने तलाक ले लिया। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें कर्ज छुपाने से रिश्ते टूट गए।
अब जरूरी है दूल्हे का ‘कर्ज-मुक्त’ होना
महिला थानों में दर्ज नए मामलों में देखा गया कि शादी फाइनल करने से पहले युवतियां दूल्हे की आर्थिक स्थिति, इनकम सोर्स और कर्ज की स्थिति की स्पष्ट जांच कर रही हैं। कई रिश्ते इसलिए टूटे क्योंकि शादी के बाद पता चला कि लड़का भारी कर्ज में डूबा था।
व्यवहार और इनकम भी बन रहे बड़े फैक्टर
विशेषज्ञों का मानना है कि लड़कियों को शादी से पहले लड़के की इनकम, व्यवहार और आर्थिक जिम्मेदारी जानने का पूरा अधिकार है। कई मामलों में लड़कों की लापरवाही और आर्थिक अस्थिरता के कारण रिश्ते कोर्ट तक पहुंच रहे हैं और कुछ सालों बाद टूट जा रहे हैं।