उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और अनियमितताओं को रोकने के उद्देश्य से नए कड़े नियम लागू किए हैं. इन परिवर्तनों से योजना में शामिल दंपत्तियों की वास्तविकता की पुष्टि होगी और भ्रष्टाचार को सीमित किया जा सकेगा.
बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य
अब सामूहिक विवाह समारोह में वर और वधू को विवाह स्थल पर आधार-लिंक्ड बायोमेट्रिक उपकरण के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी. इससे केवल वास्तविक पात्रता रखने वाले जोड़े ही योजना का लाभ उठा पाएंगे और फर्जी लाभार्थियों की रोकथाम सुनिश्चित होगी.
डीएम की व्यक्तिगत निगरानी
वर्ष 2025 में एक समारोह में 100 या इससे अधिक जोड़ों की शादी होने पर संबंधित डीएम की उपस्थिति अनिवार्य हो जाएगी. इसका मकसद आयोजन स्थल पर प्रशासनिक सतर्कता बनाए रखना और प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करना है.
सत्यापन में लापरवाही तो होगी कार्रवाई
अगर आधार सत्यापन प्रक्रिया में कोई त्रुटि या लापरवाही पाई जाती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी. यह निर्णय योजना की विश्वसनीयता बनाए रखने और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए लिया गया है.
मंडलीय उपनिदेशक एवं पर्यवेक्षक की भूमिका
अब मंडलीय उपनिदेशक और जिला समाज कल्याण विभागों के अधिकारी समारोह स्थलों पर पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त होंगे. साथ ही जरूरत पड़ने पर अन्य जिलों से निगरानी के लिए अधिकारियों को भेजा जाएगा, जिससे जांच तटस्थता बनाए रख सके.
उपहार और सेवाओं की गुणवत्ता नियंत्रण
सरकार ने उपहार सामग्री, जलपान और भोजन के मानक तय किये हैं और यह भी सुनिश्चित किया गया है कि आयोजना में फर्मों का चयन निदेशालय स्तर से किया जाए. जिससे जिला स्तर पर भ्रष्टाचार की संभावना न रहे.
योजना का उद्देश्य
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का लक्ष्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की बेटियों की शादी को प्रोत्साहित करना है. नए नियमों से योजना की अधिकारिता सशक्त होगी और लाभ केवल वास्तविक और पात्र जोड़ों तक पहुंचेगा.