Masik Shivratri 2026: मासिक शिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर शिवरात्रि आती है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और भगवान भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा करते हैं। सितंबर महीने की मासिक शिवरात्रि आज यानी 9 सितंबर, बुधवार को मनाई जा रही है। पंचांग के मुताबिक, आज दोपहर तक त्रयोदशी तिथि रहेगी और इसके बाद चतुर्दशी का आरंभ हो जाएगा। ऐसे में मासिक शिवरात्रि का व्रत आज ही रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से महादेव की उपासना करने से भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। जानें शिव पूजा की विधि, निशिता काल, शुभ मुहूर्त और व्रत के जरूरी नियम।
शिव पूजा के लिए कौन सा समय रहेगा शुभ?
आज 9 सितंबर को त्रयोदशी तिथि दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि लग जाएगी। इसी वजह से मासिक शिवरात्रि का व्रत 9 सितंबर को रखा जा रहा है। मासिक शिवरात्रि पर दिन में पूजा के लिए अभिजित मुहूर्त सुबह 11:53 बजे से दोपहर 12:43 बजे तक रहेगा। इसके अलावा अमृत काल दोपहर 1:42 बजे से 3:12 बजे तक रहने वाला है। मासिक शिवरात्रि पर रात्रि पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। भगवान शिव की उपासना के लिए निशिता काल रात 11:55 बजे से 12:41 बजे तक रहेगा। इस दौरान शिवलिंग की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।
ऐसे करें भोलेनाथ की पूजा
मासिक शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद मन ही मन भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। घर में शिवलिंग है तो पूजा की जगह को साफ करके विधि-विधान से पूजा करें। अगर संभव हो तो शिव मंदिर जाकर भी भोलेनाथ का अभिषेक कर सकते हैं। पूजा की शुरुआत शिवलिंग पर जल और गंगाजल चढ़ाकर करें। इसके बाद दूध, दही और शहद से अभिषेक करें। महादेव को बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें। पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' जैसे शिव मंत्रों का जाप करें और चाहें तो शिव चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं। इसके बाद भगवान शिव को मिठाई का भोग लगाएं और घी का दीपक जलाकर आरती करें। मासिक शिवरात्रि में रात की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। ऐसे में निशिता काल के दौरान एक बार फिर भोलेनाथ की पूजा और उनका ध्यान करना शुभ माना जाता है।
व्रत के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
मासिक शिवरात्रि पर कई श्रद्धालु पूरे दिन बिना अन्न-जल के उपवास रखते हैं, जबकि कुछ लोग फलाहार करके व्रत करते हैं। उपवास का तरीका अपनी शारीरिक क्षमता और श्रद्धा के अनुसार तय किया जा सकता है। व्रत के दौरान मन को शांत रखने और सात्विक आचरण करने की सलाह दी जाती है। इस दौरान क्रोध, झूठ बोलने और किसी के साथ अनावश्यक विवाद से बचना चाहिए। अगले दिन भगवान शिव की पूजा करने के बाद विधि से व्रत का पारण किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक शिवरात्रि पर शिव आराधना करने से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।