मध्य प्रदेश के मऊगंज में दर्ज एक मामूली लगने वाली FIR ने करोड़ों रुपये के अंतर्राज्यीय ड्रग सिंडिकेट का पर्दाफाश कर दिया। नशीली कफ सिरप की तस्करी के इस नेटवर्क की जड़ें उत्तर प्रदेश से लेकर देश के कई राज्यों तक फैली थीं। पुलिस जांच में फर्जी कंपनियों, करोड़ों की अवैध बिलिंग और बड़े मास्टरमाइंड का खुलासा हुआ है। इस पूरे मामले में अब मुख्य आरोपी विनोद अग्रवाल को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।
लावारिस कार से खुला तस्करी का पहला सुराग
इस बड़े खुलासे की शुरुआत 28 मार्च 2025 को हुई, जब मऊगंज पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर गाडा मोड़ के पास एक बिना नंबर वाली कार को घेराबंदी कर पकड़ा। कार की तलाशी लेने पर उसमें से 2160 शीशियां नशीली कफ सिरप बरामद हुईं, जिनकी कीमत लाखों रुपये बताई गई। मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ। यही कार्रवाई आगे चलकर बड़े ड्रग नेटवर्क का सुराग बनी।
फर्जी फर्मों के जरिए चलता था सप्लाई का खेल
जांच के दौरान पुलिस के सामने सुमित केसरी उर्फ अमित का नाम आया, जो वाराणसी से फर्जी फर्मों के जरिए नशीली सिरप की सप्लाई करता था। ‘नीलकंठ’ और ‘बालाजी’ नाम की कंपनियों के जरिए कागजों पर बिल बनाकर माल भेजा जाता था। जब ड्रग विभाग से जानकारी ली गई तो सामने आया कि ये सभी फर्में केवल कागजों में मौजूद थीं। पूछताछ में सुमित ने बताया कि यह पूरा सिस्टम मुख्य सरगना के निर्देश पर चलाया जा रहा था।
कानपुर से चलता था करोड़ों का ‘ड्रग साम्राज्य’
जांच आगे बढ़ने पर इस गिरोह का असली मास्टरमाइंड कानपुर निवासी विनोद अग्रवाल और उसका बेटा शिवम अग्रवाल निकले। आरोप है कि दोनों दवा लाइसेंस की आड़ में कई बड़ी कंपनियों से कोडीन युक्त कफ सिरप मंगाते थे। इसके बाद फर्जी बिलिंग के जरिए इन दवाओं को अवैध तरीके से अलग-अलग राज्यों में भेजा जाता था। जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क का कारोबार सैकड़ों करोड़ रुपये तक पहुंच चुका था।
12 राज्यों में फैला नेटवर्क, करोड़ों की बरामदगी
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि इस गिरोह ने करीब 65 से ज्यादा फर्जी कंपनियां बनाकर देश के 12 राज्यों में सप्लाई का नेटवर्क खड़ा किया था। कार्रवाई के दौरान लाखों बोतलें नशीली कफ सिरप की जब्त की गईं, जिनकी बाजार कीमत करोड़ों रुपये बताई गई। पुलिस और ड्रग विभाग की संयुक्त कार्रवाई में कई स्थानों पर छापे भी मारे गए, जिससे इस सिंडिकेट की परतें खुलती चली गईं।
युवाओं का इस्तेमाल कर फैलाया गया नशे का जाल
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने तस्करी के लिए युवाओं और खिलाड़ियों को मोहरा बनाया था। खेल गतिविधियों से जुड़े कुछ युवाओं के माध्यम से नशीली सिरप की खेप अलग-अलग जिलों तक पहुंचाई जाती थी। पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए कई जिलों में छोटे स्तर के सप्लायरों तक माल पहुंचाया जाता था। फिलहाल मुख्य आरोपी विनोद अग्रवाल को पुलिस रिमांड पर लेकर इस पूरे नेटवर्क के बाकी लिंक तलाशे जा रहे हैं।