Maulana Fazlur Rehman launches: पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (एफ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने कराची के ल्यारी इलाके से पाकिस्तान की सरकार और सेना को खुली चुनौती दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया। मौलाना का कहना है कि अगर पाकिस्तान अफगानिस्तान के भीतर जाकर कार्रवाई को सही ठहराता है, तो फिर भारत की ओर से पाकिस्तान के अंदर आतंकी ठिकानों पर हमले पर आपत्ति क्यों जताई जाती है। उनके इस बयान ने पाकिस्तान की विदेश और सुरक्षा नीति पर नई बहस छेड़ दी है।
अफगान नीति, भारत का सवाल
कराची के ल्यारी में आयोजित एक सर्वदलीय और धार्मिक संगठनों की बैठक में मौलाना फजलुर रहमान ने कहा कि पाकिस्तान खुद यह दावा करता है कि उसने अफगानिस्तान में अपने दुश्मनों के खिलाफ कार्रवाई की। अगर इस तर्क को जायज माना जाता है, तो भारत यह सवाल जरूर उठाएगा कि उसने बहावलपुर या मुरीदके जैसे इलाकों में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों की। मौलाना ने साफ कहा कि एक ही मापदंड से सभी देशों की कार्रवाइयों को देखा जाना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान की अफगानिस्तान नीति को अव्यवहारिक बताते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ रहा है।
तालिबान संपर्क, सियासी मायने
मौलाना फजलुर रहमान लंबे समय से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव कम करने की वकालत करते रहे हैं। वह उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं जिनका अफगान तालिबान नेतृत्व तक सीधा प्रभाव माना जाता है। बताया जाता है कि वह तालिबान के सर्वोच्च नेता से मुलाकात करने वाले एकमात्र पाकिस्तानी राजनीतिक नेता हैं। इसी वजह से उनके बयान को सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि नीति पर गंभीर सवाल के तौर पर देखा जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि मौलाना का यह बयान पाकिस्तान की अंदरूनी राजनीति के साथ-साथ उसकी विदेश नीति की कमजोरियों को उजागर करता है। सेना और सरकार की कथनी-करनी के अंतर को सामने लाकर उन्होंने एक बार फिर पाक सत्ता प्रतिष्ठान को कठघरे में खड़ा कर दिया है।