
लखनऊ में गुरुवार को बहुजन समाजवादी पार्टी की महारैली हुई. इस रैली में हजारों-लाखों लोग पहुंचे. इस दौरान हर कोई ये जानने के लिए उत्सुक नजर आ रहा था कि क्या समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान सच में बसपा में शामिल होने वाले हैं. मगर जैसे ही मंच से बसपा सुप्रीमो मायावती गरजीं तो सब कुछ शीशे की तरह साफ हो गया.
आजम और माया एक साथ नहीं
23 महीने बाद जेल से बाहर आने के बाद से कयासों का बाजार गर्म है. हर तरफ इस बात को लेकर चर्चा जोरों पर है कि आजम किस पार्टी का दामन थामेंगे. क्या वे पहले की तरह सपा का ही साथ निभाएंगे या फिर इस बार बहनजी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे? अटकलें लगाई जा रहीं थीं कि आजम और मायावती की मुलाकात हुई है जिसके चलते अब ये लोग एक दूसरे के साथ मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं. मगर इस रैली से एक दिन पहले ही ये तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई थी, जब सपा मुखिया अखिलेश यादव खुद आजम खान से मिलने उनके घर पहुंचे थे. वहीं आज की इस रैली ने ये बात पूरी तरह से पुख्ता कर दी है कि आजम खान मायवती के साथ है या नहीं.
आजम खान से मुलाकात के दावों को बताया निराधार
इस रैली के दौरान बसपा मुखिया मायावती ने एक बार फिर अपने राजनीतिक विरोधियों को करारा जवाब देते हुए कहा कि पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक अफवाहों से सावधान रहें. 9 अक्टूबर के कार्यक्रम का ऐलान होते ही पिछले महीने से ही कुछ विपक्षी पार्टियों ने योजनाबद्ध तरीके से झूठी खबरें फैलानी शुरू कर दी थीं. इन खबरों में यह कहा जा रहा था कि कुछ दूसरी पार्टियों के वरिष्ठ नेता, जिनमें समाजवादी पार्टी के आजम खान का नाम भी लिया जा रहा था, बीएसपी के संपर्क में हैं और वह खुद उनसे दिल्ली या लखनऊ में गुप्त रूप से मिली हैं. उन्होंने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताते हुए सख्त लहजे में कहा कि मिलना तो बहुत दूर की बात है, मैंने कभी किसी से छिपकर मुलाकात भी नहीं की है. जब भी किसी से मिलती हूं, खुलकर और साफ नीयत से मिलती हूं.
विपक्ष झूठी खबरें फैलाकर जनता को भ्रमित कर रहा- माया
बीएसपी प्रमुख ने आगे कहा कि विपक्ष इस तरह की झूठी खबरें फैलाकर जनता को भ्रमित करना चाहता है. बीएसपी के बढ़ते जनसमर्थन और संगठन की मजबूती से कुछ राजनीतिक दल घबराए हुए हैं, इसी वजह से वे पार्टी की साख को कमजोर करने के लिए फर्जी प्रचार का सहारा ले रहे हैं.
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अफवाहों पर ध्यान ना दें कार्यकर्ता- मायावती
इसके साथ ही मायावती ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें और अपने मिशन को पूरा करने पर पूरी निष्ठा से जुटे रहें. इसके साथ ही उन्होंने दोहराया कि बीएसपी ही वह पार्टी है जो दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और गरीब सवर्णों के अधिकारों की सच्ची लड़ाई लड़ रही है. आने वाले समय में पार्टी संगठन को और मजबूत किया जाएगा और जनता के हित में निर्णायक कदम उठाए जाएंगे. अपने संबोधन के आखिरी में उन्होंने कहा कि बीएसपी किसी के दबाव में नहीं चलती, ना किसी राजनीतिक दल के साथ समझौते की राजनीति करती है. पार्टी का हर फैसला जनता के हित और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए ही लिया जाता है.