Akash Anand Major Responsibility: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी में फिलहाल कोई बड़ी जिम्मेदारी देने से इनकार कर दिया है। लखनऊ में हुई पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक में मायावती ने कहा कि आकाश आनंद में अभी राजनीतिक परिपक्वता की कमी है। उनके मुताबिक, जब तक आकाश खुद को और ज्यादा परिपक्व साबित नहीं करते, तब तक उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। खास बात यह रही कि इस बैठक में आकाश आनंद को आमंत्रित नहीं किया गया था। इसे उनके राजनीतिक सफर में एक और बड़ा झटका माना जा रहा है।
2027 के चुनावों की रणनीति पर हुआ मंथन
मायावती ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और गुजरात समेत कई राज्यों के नेताओं के साथ बैठक की। इन राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर संगठन की तैयारियों और रणनीति पर चर्चा हुई। मायावती ने संबंधित राज्य इकाइयों से वहां के राजनीतिक हालात और जनता के बीच पार्टी की स्थिति की जानकारी ली। नेताओं ने जिला और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने में सामने आ रही चुनौतियों के बारे में भी बताया।
संगठन मजबूत करने पर दिया जोर
बैठक में पार्टी के कैडर का विस्तार, नेताओं के बीच बेहतर तालमेल और आम लोगों तक संगठन की पहुंच बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। राज्य स्तर के नेताओं ने संगठन से जुड़ी अपनी समस्याएं पार्टी नेतृत्व के सामने रखीं। इसके बाद मायावती ने नेताओं को इन कमियों को दूर करने और जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के निर्देश दिए। बीएसपी का फोकस अब चुनावी राज्यों में संगठन को सक्रिय करने पर है।
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हाथरस में आकाश ने शुरू किया था अभियान
आकाश आनंद ने 10 अगस्त को हाथरस के सादाबाद में जनसभा के जरिए पार्टी के चुनावी अभियान की शुरुआत की थी। इस दौरान उन्होंने भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को भी आड़े हाथों लिया था। अपने भाषण में उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को 'अंकल' कहकर संबोधित किया था। आकाश ने अपनी उम्र का जिक्र करते हुए इसे उम्र के अंतर से जोड़कर समझाया था।
पहले भी जिम्मेदारी से हटाए जा चुके हैं आकाश
आकाश आनंद के राजनीतिक सफर में यह पहला झटका नहीं है। साल 2024 में उनके एक बयान को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद मायावती ने उन्हें कुछ समय के लिए पार्टी की जिम्मेदारियों से हटा दिया था। हालांकि बाद में उन्हें दोबारा राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दी गई। अब एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी नहीं दिए जाने से बीएसपी में उनकी भूमिका और भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है।