Mayawati Major Decision: बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने पार्टी में परिवारवाद को लेकर बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने साफ कहा है कि उनके छोटे भाई आनंद कुमार के दोनों बेटों आकाश और ईशान को पार्टी में किसी भी छोटे या बड़े राजनीतिक पद की जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। हालांकि, आनंद कुमार की बेटी कुमारी दीपिका आनंद को लेकर मायावती ने भविष्य में पार्टी में जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया है।
आकाश और ईशान को लेकर फैसला साफ
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने बयान में कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य बहुजन समाज के हित और कल्याण के लिए काम करना है। उन्होंने कहा कि कांशीराम की तरह उन्होंने भी अपने परिवार के सदस्यों को संगठन के काम तक सीमित रखा और उन्हें सांसद, विधायक या मंत्री जैसे राजनीतिक पदों से दूर रखा। इसी नीति के तहत अब आनंद कुमार के बेटों को भी पार्टी में राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं देने का फैसला किया गया है।
दीपिका आनंद के लिए खुला विकल्प
मायावती ने आनंद कुमार की इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनंद को लेकर अलग रुख अपनाया है। उन्होंने बताया कि दीपिका फिलहाल वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। भविष्य में अगर वह पार्टी के काम के लिए उपलब्ध रहती हैं और उनकी ईमानदारी, निष्ठा व कार्यक्षमता सामने आती है, तो जरूरत के अनुसार उन्हें संगठन में जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि, यह जिम्मेदारी परिवार के आधार पर नहीं बल्कि उनकी योग्यता और काम के आधार पर होगी।
1. वैसे तो बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) द्वारा पूरे देश भर में व ख़ासकर उत्तर प्रदेश में युवाओं को तरजीह देने की नीति के तहत जेन-जी को लगभग पचास प्रतिशत तक पार्टी संगठन में भागीदारी सुनिश्चित करने की प्रक्रिया काफी लम्बे समय से जारी है, किन्तु अब यूपी, उत्तराखण्ड एवं पंजाब…
— Mayawati (@Mayawati) September 12, 2026
परिवार के बजाय कार्यकर्ता को जिम्मेदारी
मायावती ने कहा कि अगर दीपिका आगे चलकर जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार नहीं होती हैं, तो पार्टी की सहमति से किसी समर्पित दलित मिशनरी कार्यकर्ता को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि BSP की कमान केवल एक परिवार तक सीमित रखने के बजाय संगठन के मेहनती और विचारधारा से जुड़े कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा। मायावती ने कहा कि वह किसी पारिवारिक मोह या दबाव में आकर पार्टी के हित से समझौता नहीं करेंगी।
निष्कासित नेताओं की वापसी पर भी जवाब
मायावती ने उन चर्चाओं को भी खारिज किया जिनमें BSP से निष्कासित नेताओं की दोबारा पार्टी में वापसी की अटकलें लगाई जा रही थीं। उन्होंने ऐसी खबरों को फेक न्यूज बताया और कहा कि अनुशासनहीनता या पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण बाहर किए गए नेताओं को वापस लेने का कोई फैसला नहीं हुआ है। मायावती के इस रुख से साफ है कि वह संगठन को परिवारवाद और अनुशासनहीनता से दूर रखने की नीति पर आगे बढ़ना चाहती हैं।