बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप और गंभीर हो गया है। मार्च के मध्य से अब तक खसरे के 32,000 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आए हैं और 250 से ज्यादा की मौत हो गई है। रिपोर्ट में इसके लिए अंतरिम सरकार के उस फैसले को जिम्मेदार ठहराया गया है, जिसके तहत सितंबर 2025 में यूनिसेफ के जरिए वैक्सीन खरीद रोक दी गई थी। बांग्लादेश के अखबार 'द डेली स्टार' की एक रिपोर्ट में सरकार के उस फैसले की आलोचना की गई है, जिसमें ओपन टेंडर प्रोसेस (खुली निविदा प्रक्रिया) अपनाई गई थी, लेकिन बाद में उसमें देरी हो गई।
टीकाकरण में रुकावट
'साइंस डॉट ओआरजी' की रिपोर्ट का हवाला देते हुए अखबार ने बताया कि चेतावनी दी गई थी कि रूटीन टीकाकरण में रुकावट आ सकती है और बीमारी फैल सकती है, सरकार ने खरीद रोक दी। इससे पहले, खसरे और रूबेला के टीके की सप्लाई के लिए सरकार लंबे समय से यूनिसेफ पर निर्भर थी, जिसके लिए मुख्य रूप से 'गावी' और सरकार से फंड मिलता था।
59 प्रतिशत योग्य बच्चों को खसरे
रिपोर्ट के अनुसार, यह बीमारी जनवरी में म्यांमार सीमा के पास रोहिंग्या शरणार्थी कैंपों में शुरू हुई और देश के 64 में से 58 जिलों में फैल गई, जिससे 21,000 से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। सरकारी आंकड़ों से पता चला कि 2025 में सिर्फ 59 प्रतिशत योग्य बच्चों को खसरे का टीका लगा था, हालांकि बाद में ये आंकड़े आधिकारिक वेबसाइटों से हटा दिए गए। अफसरशाही की वजह से टेंडर प्रक्रिया में देरी हुई, जिससे टीके की सप्लाई में कमी आई और रूटीन टीकाकरण प्रभावित हुआ।
टीके की खरीद फिर से शुरू
आईईडीसीआर के पूर्व प्रिंसिपल साइंटिस्ट एएसएम आलमगीर के अनुसार, 2024 से विटामिन ए वितरण अभियान के नाकाम रहने से बच्चों की इम्यूनिटी और कमजोर हो गई है।डीजीएचएस में डिजीज कंट्रोल के पूर्व निदेशक बे-नजीर अहमद ने कहा कि हालांकि बांग्लादेश ने अप्रैल में यूनिसेफ के जरिए टीके की खरीद फिर से शुरू की और आपातकालीन टीकाकरण अभियान भी चलाया, लेकिन बीमारी के फैलने की रफ्तार को देखते हुए इसके जल्द काबू में आने की संभावना कम है।
खसरा-रूबेला की पहली डोज
रिपोर्ट में बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के वकील बिप्लब कुमार दास ने अंतरिम सरकार के तहत कथित भ्रष्टाचार और टीके की खरीद में नाकामी को लेकर एंटी-करप्शन कमीशन (भ्रष्टाचार-रोधी आयोग) में शिकायत दर्ज कराई है।बांग्लादेश के 'कवरेज इवैल्यूएशन सर्वे (मूल्यांकन सर्वेक्षण) 2026' में पाया गया कि खसरा-रूबेला की पहली डोज का कवरेज (टीकाकरण) 2019 के 88.6 प्रतिशत से घटकर 2023 में 86 प्रतिशत हो गया, जबकि इसी दौरान दूसरी डोज का कवरेज 89 प्रतिशत से घटकर 80.7 प्रतिशत रह गया। खसरे के प्रसार को रोकने के लिए आम तौर पर लगभग 95 प्रतिशत कवरेज की जरूरत होती है।