Meat Shops Shifted Outside: वाराणसी नगर निगम ने शहर में संचालित मीट, मांस और मछली की दुकानों को शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने का फैसला लिया है। नगर निगम की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जिसके तहत काशी शहर के भीतर कच्चे मीट और मछली की बिक्री पर रोक लगाते हुए दुकानों को निर्धारित बाहरी क्षेत्रों में शिफ्ट किया जाएगा। नगर निगम का मानना है कि इससे धार्मिक नगरी में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।
पिछले साल पार्षद ने उठाया था मुद्दा
यह मांग पहली बार पिछले वर्ष नगर निगम सदन में उठाई गई थी। पार्षद गुलशन अली ने प्रस्ताव रखते हुए कहा था कि सावन जैसे धार्मिक महीनों में दुकानों के बंद रहने से व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उनका सुझाव था कि इन दुकानों को शहर के बाहर व्यवस्थित रूप से स्थानांतरित किया जाए, जिससे व्यापार भी प्रभावित न हो और धार्मिक गतिविधियों में भी किसी तरह की बाधा न आए।
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को बताया गया वजह
नगर निगम के अनुसार, काशी विश्वनाथ धाम के विकास और विस्तार के बाद शहर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में आने वाले भक्तों और पर्यटकों को ध्यान में रखते हुए शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत बनाने की दिशा में यह कदम उठाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि संकरी गलियों और प्रमुख धार्मिक मार्गों पर मीट और मछली की दुकानों के कारण कई बार असुविधा की शिकायतें सामने आती थीं।
यह भी देखेंःWeather Update: बारिश की राहत खत्म, फिर बढ़ेगा तापमान; आज 44 डिग्री के करीब पहुंच सकती है गर्मी
इन क्षेत्रों में स्थानांतरित की जाएंगी दुकानें
नगर निगम की योजना के अनुसार शहर के भीतर संचालित दुकानों को रामनगर, सूजाबाद, गनेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर जैसे बाहरी इलाकों में स्थानांतरित किया जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि आगामी नवरात्र तक यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। इसके लिए संबंधित व्यापारियों के साथ समन्वय कर नई व्यवस्था तैयार की जा रही है, ताकि कारोबार पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के मद्देनजर फैसला
वाराणसी को देश की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक नगरीयों में गिना जाता है। काशी विश्वनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक महत्व के कारण काशी की विशेष पहचान है। नगर निगम का कहना है कि शहर की इसी पहचान और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।