
राजस्थान स्वास्थ्य विभाग ने मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत दवाओं के सुरक्षित उपयोग को लेकर दिशा निर्देश तय किए हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौर के अनुसार, दवाएं केवल पंजीकृत डॉक्टर की सलाह पर ली जाएं और स्वयं दवा लेने से बचें। उन्होंने चेताया कि बिना उचित परामर्श के दवा वितरण या सेवन, या लापरवाही की वजह से दुष्प्रभाव होने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
जनजागरूकता बढ़ाने को लेकर राज्यभर में शनिवार से आशा, एएनएम और सीएचओ टीमें घर-घर सर्वे करने वाली हैं। ये टीमें लोगों को बीमार पड़ते ही चिकित्सकीय परामर्श लेने, दवाओं को बच्चों की पहुंच से दूर रखने को लेकर तय मात्रा में ही दवा लेने के बारे में जागरूक किया करेंगी।
कफ सिरप लेने के बाद गंभीर दुष्प्रभाव
हाल ही में बच्चों की ओर से बिना पर्ची के कफ सिरप लेने के बाद गंभीर दुष्प्रभाव देखे गए। घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए राठौर ने कहा कि फार्मासिस्ट बिना पर्ची के दवाएं न दें। डॉक्टर बच्चों एवं वयस्कों को दवा लिखते वक्त प्रोटोकॉल को ध्यान में रखें । उन्होंने निर्देश दिया है कि मरीजों और उनके परिजनों को दवा सही मात्रा, सेवन की संभावित दुष्प्रभावों की स्पष्ट जानकारी मिले ।
पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश
राठौर के अनुसार, मानसून के बाद खांसी, सर्दी और बुखार के केस में बढ़ोतरी को देखते हुए सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को सतर्क किया गया है। उन्होंने डॉक्टरों को आयु-विशेष पर्चे के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा है। जांच व उपचार की पर्याप्त व्यवस्था तय करने के आदेश दिए गए हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के मिशन निदेशक डॉ. अमित यादव का कहना है कि चार वर्ष से कम आयु के बच्चों को डेक्स्ट्रोमॉर्फन से जुड़ी दवाएं नहीं दी जानी चाहिए।