मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने राजधानी भोपाल में जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के बाहर धरना देने के साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरएसएस की यूनिफॉर्म टांगकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
नामांकन रद्द होने के बाद सड़क पर उतरी कांग्रेस
राज्यसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने से पार्टी में नाराजगी बढ़ गई। पार्टी नेताओं ने इस फैसले को लेकर सवाल उठाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। कांग्रेस का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता नहीं बरती गई और लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी की गई है।
चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर अनोखा प्रदर्शन
विरोध दर्ज कराने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भोपाल स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के बाहर आरएसएस की यूनिफॉर्म टांग दी। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह प्रतीकात्मक प्रदर्शन संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर उनकी नाराजगी को दर्शाता है। इस दौरान कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे और नारेबाजी भी की गई।
देर रात तक चला धरना
नामांकन रद्द होने की जानकारी सामने आने के बाद कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और विधायक देर रात मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय पहुंच गए। नेताओं ने कार्यालय के बाहर धरना दिया और पूरी रात विरोध जारी रखा। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए और फैसले पर पुनर्विचार की मांग की।
दिग्विजय सिंह ने उठाए गंभीर सवाल
धरने के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने इस तरह का घटनाक्रम पहले कभी नहीं देखा। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि वे इस मुद्दे को कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर उठाएंगे।
राज्यसभा चुनाव पर बढ़ा सियासी घमासान
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी टकराव और तेज हो गया है। कांग्रेस इस फैसले के खिलाफ लगातार विरोध दर्ज करा रही है, जबकि राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। आने वाले दिनों में यह मामला राज्य की राजनीति में और अधिक गर्मी ला सकता है।
विधानसभा के बाहर भी कांग्रेस का प्रदर्शन
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के बाहर धरने के साथ-साथ कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विधानसभा परिसर के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पार्टी नेताओं ने राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सरकार और निर्वाचन तंत्र के खिलाफ नारेबाजी की। नेता प्रतिपक्ष समेत कई वरिष्ठ नेता प्रदर्शन में शामिल हुए और नामांकन रद्द किए जाने के फैसले को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी आपत्तियों पर विचार नहीं किया गया तो पार्टी आंदोलन को और व्यापक रूप दे सकती है। विधानसभा के बाहर हुए इस प्रदर्शन के चलते राजनीतिक माहौल और अधिक गर्मा गया तथा राज्यसभा चुनाव का मुद्दा प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया।