मेरठ के सेंट्रल मार्केट में अवैध निर्माण को लेकर स्थिति निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। लखनऊ से नियोजन विभाग की टीम आज शहर पहुंच रही है, जिससे लंबे समय से चल रहे असमंजस पर स्पष्टता आने की उम्मीद है। सेटबैक नियमों और पुराने निर्माणों को लेकर व्यापारियों में चिंता गहराती जा रही है। संभावित नोटिस और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई ने बाजार में बेचैनी का माहौल बना दिया है।
लखनऊ से टीम का आगमन, बढ़ी हलचल
सेंट्रल मार्केट सीलिंग मामले में सोमवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की नियोजन टीम के मेरठ पहुंचने से पूरे मामले में तेजी आने के संकेत हैं। टीम मौके का निरीक्षण कर यह तय करेगी कि किन निर्माणों पर नियम लागू होंगे और किस हद तक कार्रवाई की जाएगी।
सेटबैक नियम बना सबसे बड़ा सवाल
पूरे विवाद का केंद्र सेटबैक यानी भवन के आसपास छोड़ी जाने वाली खुली जगह है। नई उपविधियों के तहत यह नियम आवासीय और व्यावसायिक दोनों भवनों पर लागू होता है। लेकिन छोटे भूखंडों पर बने मकानों और दुकानों के लिए यह नियम सबसे बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि निर्धारित मानकों का पालन करना यहां लगभग असंभव है।
छोटे प्लॉट, बड़ा संकट
सेंट्रल मार्केट के सेक्टर-2 में स्थिति और जटिल है, जहां 25 से 38 वर्ग मीटर के छोटे प्लॉट पर ही निर्माण हुआ है। इन इमारतों में नीचे दुकानें और ऊपर आवास बने हुए हैं। यदि सेटबैक के नियमों को सख्ती से लागू किया गया, तो कई दुकानों और मकानों को आंशिक या पूर्ण रूप से हटाना पड़ सकता है।
पुराने ढांचे पर मंडराता खतरा
बाजार के कई निर्माण 35-40 साल पुराने हैं, जिन्हें समय-समय पर केवल मरम्मत के जरिए बनाए रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन इमारतों में तोड़फोड़ की गई, तो पूरा ढांचा गिरने का खतरा पैदा हो सकता है। यही कारण है कि व्यापारी न सिर्फ कारोबार बल्कि सुरक्षा को लेकर भी चिंतित हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और संभावित कार्रवाई
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। अवैध निर्माण हटाने के लिए 10 से 15 दिन का नोटिस दिए जाने की तैयारी है। तय समय में कार्रवाई न करने पर प्रशासन खुद ध्वस्तीकरण करेगा और इसका खर्च भी संबंधित मालिकों से वसूला जाएगा। माना जा रहा है कि टीम के सर्वे के साथ ही नोटिस जारी होने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।