
मेरठ में हाल ही में आसमान में उड़ते ड्रोन को देखकर लोगों में डर फैल गया. अंधेरे में उड़ते ड्रोन के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिससे लोगों को शक होने लगा कि शायद यह चोरी या डकैती की रेकी के लिए किया जा रहा है. डर के मारे कई लोगों ने पुलिस को भी इसकी सूचना दी, लेकिन शुरुआत में पुलिस को भी यह समझ नहीं आया कि ड्रोन कौन उड़ा रहा है और क्यों. धीरे-धीरे अफवाहें फैलने लगीं कि अपराधी गिरोह रेकी करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं.
सामने आई सच्चाई तो लोगों ने ली राहत की सांस
इस अफरातफरी के बीच भारतीय सर्वेक्षण विभाग की ओर से एक पत्र सामने आया, जिसमें साफ बताया गया कि यह ड्रोन किसी अपराध के लिए नहीं, बल्कि हिंडन नदी का सर्वे करने के लिए उड़ाया गया था. यह सर्वे उत्तर प्रदेश की नदियों की डिजिटल एलीवेशन मैपिंग के लिए किया जा रहा है और यह कार्य मेरठ, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में चल रहा है. ड्रोन सर्वे को लेकर आम लोग अब राहत महसूस कर रहे हैं, क्योंकि यह डर था कि कहीं कुछ गलत न हो रहा हो, लेकिन अब साफ हो गया है कि यह एक सरकारी योजना के तहत हो रहा है.
क्या कहती है ड्रोन संचालन नीति?
डीआईजी कलानिधि नैथानी ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश में 2023 से लागू ड्रोन संचालन सुरक्षा नीति के तहत अब हर ड्रोन का पंजीकरण जरूरी है. हर ड्रोन को एक विशेष पहचान नंबर (ID) दिया जाएगा. साथ ही, ड्रोन उड़ाने के लिए तीन जोन तय किए गए हैं:
रेड जोन- पूरी तरह नो-फ्लाई जोन, जहां ड्रोन उड़ाना मना है.
येलो जोन- ड्रोन उड़ाने के लिए प्रशासन से मंजूरी जरूरी.
ग्रीन जोन- सामान्य तौर पर ड्रोन उड़ाने की अनुमति है.
अब प्रशासन की निगरानी में ही ड्रोन उड़ाए जा सकेंगे ताकि जनता की सुरक्षा और भरोसा दोनों बनाए रखा जा सके. इस खबर से यह भी स्पष्ट हो गया कि किसी भी अफवाह से पहले सत्यता की जांच जरूरी है, ताकि बेवजह डर या भ्रम न फैले.