उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत पिछले 9 वर्षों में अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है. प्रदेश में कुल 17,043 पुलिस मुठभेड़ हुईं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा मेरठ जोन की हो रही है. मेरठ पूरे प्रदेश में एनकाउंटर कार्रवाई के मामले में पहले स्थान पर रहा. यहां अकेले 4,813 मुठभेड़ हुईं, जिसने इसे अपराधियों के खिलाफ सबसे बड़े अभियान का केंद्र बना दिया.
97 अपराधी मारे गए
मेरठ जोन में इन मुठभेड़ों के दौरान पुलिस ने 8,921 अपराधियों को गिरफ्तार किया, जबकि 3,513 अपराधी घायल हुए. सबसे बड़ी बात यह रही कि 97 कुख्यात अपराधियों को मौके पर ही मार गिराया गया. यह आंकड़ा पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा है. सरकार का दावा है कि लगातार कार्रवाई से अपराधियों में कानून का डर पैदा हुआ है और अपराध नियंत्रण में मदद मिली है.
यूपी में बड़ा अभियान
पूरे प्रदेश की बात करें तो 9 वर्षों में 289 दुर्दांत अपराधी मुठभेड़ में मारे गए. पुलिस ने 34,253 अपराधियों को गिरफ्तार किया और 11,834 अपराधियों को घायल किया गया. हालांकि इस दौरान पुलिस बल को भी नुकसान उठाना पड़ा. अपराधियों से मुठभेड़ के दौरान 18 पुलिसकर्मी शहीद हुए और 1,852 जवान घायल हुए.
वाराणसी और आगरा भी आगे
एनकाउंटर के मामले में मेरठ के बाद वाराणसी जोन दूसरे स्थान पर रहा, जहां 1,292 मुठभेड़ हुईं और 29 अपराधी ढेर किए गए. वहीं आगरा जोन तीसरे स्थान पर रहा, जहां 2,494 मुठभेड़ों में 24 अपराधी मारे गए. इसके अलावा बरेली, लखनऊ, गाजियाबाद और प्रयागराज में भी बड़ी कार्रवाई दर्ज की गई.
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कमिश्नरेट में गाजियाबाद अव्वल
अगर कमिश्नरेट स्तर की बात करें तो गाजियाबाद सबसे आगे रहा. यहां 789 एनकाउंटर में 18 अपराधियों को ढेर किया गया. लखनऊ कमिश्नरी में 12 और कानपुर कमिश्नरी में 4 अपराधी मारे गए. सरकार इसे अपराध के खिलाफ सख्त नीति का असर बता रही है. वहीं विपक्ष लगातार इन आंकड़ों और कार्रवाई के तरीके पर सवाल भी उठाता रहा है.