उल्देपुर में अवैध कॉलोनियों के ध्वस्तीकरण के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) ने कार्रवाई की रणनीति तेज कर दी है। अब सिर्फ कॉलोनियों पर बुलडोजर चलाने का सवाल नहीं है, बल्कि यह भी जांच के दायरे में है कि महज पांच साल में लाल डोरा क्षेत्र में 100 से अधिक अवैध कॉलोनियां कैसे विकसित हो गईं और जिम्मेदार विभागों के अधिकारियों ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की।
विभागीय स्तर पर भी सवाल खड़े हो रहे
उल्देपुर में बजरंग कुंज, श्याम कुंज, कैलाश कुंज, माधव कुंज, कृष्ण कुंज, विनायक कुंज, अमर कुंज, सावरिया कुंज, शिव कुंज, वासुदेव कुंज, गोधाम और तीरपाल एंक्लेव समेत कई कॉलोनियां विकसित हुई हैं। कुछ ही वर्षों में गांव का स्वरूप तेजी से बदलने को लेकर अब विभागीय स्तर पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
बुलडोजर चला, फिर भी बसती रहीं कॉलोनियां
मेडा के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में विकसित हुई अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई की गई थी। कुछ स्थानों पर दोबारा कॉलोनियां विकसित होने की बात सामने आने के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई। अब प्राधिकरण पुलिस से इन मामलों में हुई कार्रवाई की जानकारी जुटा रहा है।
बिजली कनेक्शन और रजिस्ट्री ने बढ़ाए सवाल
कार्रवाई के बावजूद अवैध कॉलोनियों में बिजली के खंभे और लाइनें पहुंचने तथा भूखंडों की रजिस्ट्री जारी रहने की बात सामने आई है। मेडा ने विद्युत विभाग और रजिस्ट्री विभाग से पत्राचार किया है। न्यायिक आयोग इन मामलों में संबंधित विभागों की भूमिका और उपलब्ध रिकॉर्ड की भी पड़ताल करेगा।
9 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में देना है जवाब
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मेडा ध्वस्तीकरण की कार्ययोजना तैयार कर रहा है। 9 दिसंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में कार्रवाई की रिपोर्ट पेश की जानी है। ध्वस्तीकरण के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन के लिए चुनौती होगी। कार्रवाई की आशंका को लेकर कॉलोनी मालिकों और भूखंड खरीदारों में विरोध के स्वर पहले ही सामने आ चुके हैं। मेडा उपाध्यक्ष संजय कुमार मीना के अनुसार, उल्देपुर में पहले भी अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है और उसका रिकॉर्ड उपलब्ध है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा।