मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद अब उनकी जेल से जुड़ी व्यवस्था चर्चा में है। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर मुस्कान की फांसी की सजा पर आगे चलकर अमल होता है, तो उसे कहां फांसी दी जाएगी। दरअसल, उत्तर प्रदेश में महिलाओं को फांसी देने के लिए मथुरा जेल में खास व्यवस्था मौजूद है। यही वजह है कि मेरठ जेल के बजाय मथुरा जेल का नाम चर्चा में आ रहा है। आइए जानते हैं इसकी पूरी वजह।
मेरठ के सौरभ हत्याकांड में क्या हुआ
मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस मामले में सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को अदालत ने 14 अक्टूबर 2026 को मौत की सजा सुनाई। सौरभ की हत्या मार्च 2025 में हुई थी। उनका शव घर में रखे नीले ड्रम में मिला था, जिसमें सीमेंट भरा गया था। अदालत ने मामले में पेश किए गए सबूतों और अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोनों को मृत्युदंड दिया।
मथुरा जेल में ही क्यों है खास व्यवस्था
मथुरा जेल का नाम सामने आने की सबसे बड़ी वजह वहां महिलाओं को फांसी देने के लिए मौजूद विशेष व्यवस्था है। देश में महिला कैदियों को फांसी देने की व्यवस्था बहुत सीमित जगहों पर है। उत्तर प्रदेश में मथुरा जेल में इसके लिए फांसीघर मौजूद है। इसी कारण अगर किसी महिला कैदी की मौत की सजा पर कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अमल करने की स्थिति बनती है, तो मथुरा जेल की भूमिका अहम हो सकती है।
पहले भी चर्चा में आ चुके हैं ऐसे मामले
मथुरा जेल का नाम पहले भी महिला कैदियों से जुड़े मौत की सजा के मामलों में सामने आ चुका है। शबनम का मामला इसका एक चर्चित उदाहरण है। हालांकि, किसी कैदी को मौत की सजा सुनाए जाने का मतलब यह नहीं होता कि उसे तुरंत फांसी दे दी जाएगी। इसके लिए कानून के तहत आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसलिए मुस्कान के मामले में भी जेल से जुड़ी चर्चा को अंतिम फैसले के रूप में नहीं देखना चाहिए।
पवन जल्लाद ने क्या कहा
इस मामले में निर्भया कांड के दोषियों को फांसी देने वाले पवन जल्लाद का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें आधिकारिक आदेश मिलता है, तो वह अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं। हालांकि, किसी भी तरह की कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों के आदेश और कानूनी प्रक्रिया जरूरी होती है। अभी इस बयान को संभावित व्यवस्था के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
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मुस्कान के मामले में आगे क्या होगा
मुस्कान और साहिल को सजा सुनाए जाने के बाद भी कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। दोनों के पास ऊपरी अदालत में अपील करने का विकल्प है। जब तक अपील और मौत की सजा से जुड़ी जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी नहीं होतीं, तब तक फांसी की तारीख या उसके अमल को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। फिलहाल मथुरा जेल चर्चा में इसलिए है, क्योंकि वहां महिलाओं को फांसी देने की विशेष व्यवस्था मौजूद है।