उत्तर प्रदेश के Meerut में पाकिस्तानी नागरिक बताकर गिरफ्तार की गई महिला सबा का मामला अब नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। इस मामले में सबा के वकील ने पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अधिवक्ता का कहना है कि जिस वोटर कार्ड को आधार बनाकर पुलिस ने सबा को जेल भेजा, वह वास्तव में किसी दूसरी महिला का असली पहचान पत्र है। इस खुलासे के बाद पूरे मामले में जांच की दिशा पर चर्चा तेज हो गई है।
वोटर कार्ड को लेकर वकील का बड़ा दावा
सबा के अधिवक्ता वी.के. शर्मा का कहना है कि पुलिस जिस ‘नाजिया’ के वोटर कार्ड को फर्जी बता रही है, वह सठला गांव की रहने वाली महिला का असली कार्ड है। उनके मुताबिक उस महिला के पति पेशे से प्रोफेसर हैं, जबकि सबा के पति बैंड का कारोबार करते हैं। वकील का आरोप है कि पुलिस ने बिना पूरी जांच और पहचान सत्यापन के जल्दबाजी में कार्रवाई करते हुए सबा को गिरफ्तार कर लिया।
ईपीआईसी नंबर से उठे नए सवाल
वकील ने मीडिया के सामने नाजिया का वोटर कार्ड दिखाते हुए बताया कि उसका ईपीआईसी (EPIC) नंबर TXL0674044 है। उनका दावा है कि यही नंबर पुलिस ने अपनी शिकायत में सबा के फर्जी दस्तावेज के रूप में बताया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि यह कार्ड किसी और महिला का असली है, तो इसके आधार पर सबा के खिलाफ कार्रवाई कैसे की गई।
शिकायत के बाद दर्ज हुआ था मामला
यह पूरा मामला तब सामने आया जब रुकसाना खान नाम की महिला ने शिकायत दर्ज कराई। आरोप लगाया गया कि जली कोठी इलाके में रहने वाली सबा पाकिस्तानी नागरिक है और पिछले करीब 33 साल से अवैध रूप से भारत में रह रही है। शिकायत में यह भी कहा गया कि उसने कथित तौर पर फर्जी तरीके से भारतीय पहचान पत्र बनवाए हैं।
17 फरवरी को भेजी गई थी जेल
शिकायत के आधार पर 16 फरवरी को देहली गेट थाने में मामला दर्ज किया गया था। इसके अगले दिन यानी 17 फरवरी को पुलिस ने सबा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हालांकि अब वकील के दावों के बाद इस पूरे मामले की जांच और पुलिस की कार्रवाई पर नए सवाल खड़े हो गए हैं