
मेरठ में पुलिस विभाग के भीतर एक बड़ी और सख्त कार्रवाई ने सभी को चौंका दिया. बुधवार देर रात, एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने परतापुर थाने में तैनात 11 पुलिसकर्मियों को एक साथ लाइन हाजिर करने का आदेश दे दिया. इस सूची में छह मुख्य आरक्षी, चार आरक्षी और एक महिला मुख्य आरक्षी शामिल हैं. इतने बड़े पैमाने पर कार्रवाई होते ही पुलिस महकमे में खलबली मच गई और यह चर्चा का विषय बन गया. दरअसल एसएसपी को हाल ही में एक अज्ञात पत्र प्राप्त हुआ था. यह कोई साधारण पत्र नहीं था. इसके साथ कुछ पुख्ता सबूत और एक सूची भी थी, जिसमें 11 पुलिसकर्मियों के नाम शामिल थे. पत्र में गंभीर आरोप लगाए गए थे कि ये पुलिसकर्मी अपने पद का दुरुपयोग कर इलाके के लोगों को डराकर और धमकाकर वसूली कर रहे हैं. बताया गया कि सुबह से लेकर शाम तक यह सिलसिला चलता था और लोगों को तरह-तरह के बहानों से परेशान करके पैसे वसूले जा रहे थे.
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आरोपों को एसएसपी ने गंभीरता से लिया
इन आरोपों को एसएसपी ने बेहद गंभीरता से लिया और मामले की जांच एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह को सौंपी. जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्य और गवाहों के बयानों ने आरोपों की पुष्टि कर दी. रिपोर्ट में साफ लिखा था कि सूची में शामिल पुलिसकर्मियों ने अपने कर्तव्यों के खिलाफ जाकर वसूली की है, जो पुलिस की छवि को खराब करने वाला कृत्य है. रिपोर्ट मिलने के तुरंत बाद देर रात ही एसएसपी ने बिना देरी किए कार्रवाई करते हुए मुख्य आरक्षी अंकित कुमार, सुखराज सिंह, कृष्ण कुमार, अशोक कुमार, सतीश अत्री, अमित कुमार, महिला मुख्य आरक्षी पूजा, और आरक्षी अजय भारद्वाज, मोहित कुमार, धर्मेंद्र कुमार व मुकेश कुमार सभी को लाइन हाजिर करने का आदेश जारी कर दिया.
एसएसपी ने दी चेतावनी
सएसपी डॉ. विपिन ताडा ने साफ चेतावनी दी है कि मेरठ पुलिस में भ्रष्टाचार, वसूली या आम जनता के साथ किसी भी तरह की जबरदस्ती को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि अगर भविष्य में किसी के खिलाफ ऐसे आरोप साबित होते हैं तो उससे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि पुलिस की छवि और जनता का भरोसा दोनों कायम रह सके.