Meerut Snake Murder Case : उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित सांप कांड में जिला अदालत ने 16 अक्टूबर को रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई। दोनों को 7 अक्टूबर को अमित कश्यप की हत्या का दोषी ठहराया गया था। सजा के ऐलान के दौरान दोनों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया। मामले में अभियोजन पक्ष ने हत्या की साजिश और उसे छिपाने के कथित प्रयासों को गंभीर बताते हुए अधिकतम सजा की मांग की थी।
अदालत ने मामले को दुर्लभतम श्रेणी में माना
मामले में बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया। वकील के मुताबिक, अदालत ने अपराध को दुर्लभतम से दुर्लभ श्रेणी का मानते हुए दोनों दोषियों को मृत्युदंड दिया। मृतक अमित की मां ने फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि परिवार शुरुआत से ही दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग कर रहा था। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपराध की प्रकृति, हत्या के पीछे के मकसद और कथित साजिश के तरीके का उल्लेख किया।
सांप के काटने का मामला समझी गई थी मौत
यह मामला 12 अप्रैल 2025 को सामने आया था, जब अमित कश्यप अपने घर में मृत पाए गए थे। शव के पास सांप मिलने के कारण शुरुआत में मौत को सर्पदंश से जोड़कर देखा गया। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने से मौत की बात सामने आने के बाद जांच की दिशा बदल गई। पुलिस ने मामले की जांच करते हुए हत्या की साजिश का आरोप लगाया और रविता तथा अमरदीप को गिरफ्तार किया। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, हत्या के बाद शव के पास सांप छोड़कर मौत को सर्पदंश दिखाने की कोशिश की गई थी।
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सरकारी गवाह के बयान से जांच को मिली मदद
जांच के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर सांप उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति से पूछताछ की और उसे सरकारी गवाह बनाया। अभियोजन पक्ष ने अदालत में साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अपना पक्ष रखा। इन्हीं साक्ष्यों पर सुनवाई के बाद 7 अक्टूबर को रविता और अमरदीप को हत्या का दोषी करार दिया गया था। इसके बाद अदालत में सजा की अवधि और अपराध की गंभीरता को लेकर बहस हुई। 16 अक्टूबर को इसी मामले में मृत्युदंड का फैसला सुनाया गया।
परिजनों ने जताया संतोष, फैसले पर सबकी नजर
फैसले के बाद अमित कश्यप के परिवार ने राहत जताई। सुनवाई के दौरान उनकी मां ने आरोप लगाया था कि रविता और अमरदीप के बीच संबंधों को लेकर परिवार में विवाद होता था और उनके बेटे की हत्या की गई। अदालत ने दोषसिद्धि के बाद दोनों को फांसी की सजा सुनाई है। हालांकि, मृत्युदंड के मामलों में आगे की न्यायिक प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में हाईकोर्ट की पुष्टि और उपलब्ध कानूनी उपायों के बाद ही सजा के अंतिम क्रियान्वयन की स्थिति तय होती है।