भोपाल। अगर आपको लंबे समय से खांसी और बुखार की शिकायत है और दवाइयों के बाद भी राहत नहीं मिल रही है, तो सतर्क हो जाइए। मध्य प्रदेश में ऐसी बीमारी ने दस्तक दी है, जिसके लक्षण शुरुआत में साधारण लगते हैं, लेकिन समय रहते इलाज न हो तो यह जानलेवा साबित हो सकती है। इस बीमारी का नाम मेलिओइडोसिस (Melioidosis) है। यह बीमारी धीरे-धीरे राज्य के कई जिलों में फैल रही है और अब यह प्रदेश में स्थानिक (endemic) हो चुकी है।
क्या है मेलिओइडोसिस?
मेलिओइडोसिस एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जिसे Burkholderia pseudomallei नामक बैक्टीरिया फैलाता है। यह बैक्टीरिया आमतौर पर मिट्टी और पानी में पाया जाता है। इंसानों में यह संक्रमण सांस के जरिए, खुले घाव से या दूषित पानी के संपर्क से फैल सकता है।
लक्षण क्यों हैं खतरनाक?
इस बीमारी के शुरुआती लक्षण साधारण खांसी और बुखार जैसे होते हैं। मरीज को लगता है कि यह सामान्य सर्दी-जुकाम या टीबी है, लेकिन जब संक्रमण बढ़ता है तो लक्षण गंभीर रूप लेने लगते हैं। इनमें लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना, थकान और फेफड़ों में संक्रमण शामिल है। कई बार यह सेप्सिस और अंगों को नुकसान पहुंचाकर मौत का कारण भी बन जाती है।
मध्य प्रदेश में बढ़ रहे मामले
प्रदेश के अलग-अलग जिलों से मेलिओइडोसिस के नए मामले सामने आ रहे हैं। हाल ही में 14 नए केस रिपोर्ट हुए हैं। पिछले कुछ सालों में 130 से अधिक मरीज इस बीमारी से संक्रमित पाए जा चुके हैं और ये मामले 20 से ज्यादा जिलों से जुड़े हुए हैं। इससे साफ है कि यह बीमारी अब प्रदेश में स्थायी रूप से फैल चुकी है।
रोकथाम और इलाज
विशेषज्ञों के अनुसार, मेलिओइडोसिस का इलाज संभव है, लेकिन इसके लिए शुरुआती स्तर पर पहचान बेहद जरूरी है। लंबे समय तक खांसी-बुखार बने रहने पर तुरंत जांच करानी चाहिए। मरीज को एंटीबायोटिक्स की लंबी अवधि तक दवाएं दी जाती हैं। वहीं, संक्रमण से बचने के लिए साफ पानी का उपयोग, घाव को ढककर रखना और मिट्टी-पानी के सीधे संपर्क से बचना जरूरी है।