अमेरिका के चार राज्यों ने Meta पर करीब 1.4 ट्रिलियन डॉलर (करीब 120 लाख करोड़ रुपये) की पेनाल्टी लगाने की मांग की है। यह रकम टेक इंडस्ट्री के इतिहास की सबसे बड़ी संभावित पेनाल्टी मानी जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि यह राशि Meta की कुल मार्केट वैल्यू के लगभग बराबर है। इस मामले की सुनवाई अगस्त में कैलिफोर्निया की एक फेडरल कोर्ट में होगी। वहीं, 14 अन्य राज्यों ने भी Meta के खिलाफ अलग-अलग कानूनी कार्रवाई शुरू कर रखी है।
क्या हैं कंपनी पर आरोप?
राज्यों का आरोप है कि Meta ने Facebook और Instagram के कई फीचर जानबूझकर ऐसे बनाए, जिससे बच्चे और किशोर इन प्लेटफॉर्म पर ज्यादा समय बिताएं। इसमें लगातार स्क्रॉल होने वाली फीड, लाइक सिस्टम, नोटिफिकेशन और रिकमेंडेशन एल्गोरिदम जैसे फीचर शामिल हैं। शिकायत में कहा गया है कि इनकी वजह से बच्चों में सोशल मीडिया की लत, चिंता, डिप्रेशन और नींद से जुड़ी समस्याएं बढ़ी हैं। साथ ही आरोप है कि कंपनी को इन जोखिमों की जानकारी होने के बावजूद उसने अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बताया।
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Meta ने आरोपों से किया इनकार
Meta ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सोशल मीडिया एडिक्शन को आधिकारिक मानसिक बीमारी नहीं माना जाता। कंपनी का दावा है कि उसने युवाओं की सुरक्षा के लिए कई नए फीचर जोड़े हैं और राज्यों की ओर से मांगी गई पेनाल्टी का कोई मजबूत कानूनी आधार नहीं है। कंपनी का कहना है कि वह अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखेगी।
भारत में भी बढ़ा दबाव
Meta पर सिर्फ अमेरिका में ही नहीं, भारत में भी दबाव बढ़ रहा है। हाल ही में भारत सरकार ने इंस्टाग्राम पर कथित चाइल्ड सेक्सुअल कंटेंट से जुड़े मामले में कंपनी को नोटिस भेजा है। इससे पहले भी Meta, YouTube और दूसरी सोशल मीडिया कंपनियों पर बच्चों की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगते रहे हैं। अगर अदालत राज्यों के पक्ष में फैसला देती है, तो यह केवल Meta ही नहीं बल्कि पूरी सोशल मीडिया इंडस्ट्री के लिए बड़ा कानूनी और नीतिगत बदलाव साबित हो सकता है।