करीब 4 साल के इंतजार के बाद फीफा वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत हो गई। मेक्सिको सिटी के ऐतिहासिक एजटेका स्टेडियम में हजारों दर्शकों की मौजूदगी में उद्घाटन मुकाबला खेला गया। मैच से पहले रंगारंग कार्यक्रम ने माहौल को और खास बना दिया। स्टेडियम में मौजूद 85 हजार से ज्यादा दर्शकों ने इस बड़े आयोजन का आनंद लिया। इसके बाद मैदान पर मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका की टीमें आमने-सामने उतरीं।
शुरुआत से ही दिखा मेक्सिको का दबदबा
घरेलू मैदान पर खेल रही मेक्सिको की टीम ने मैच की शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। टीम ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार दक्षिण अफ्रीका के गोल पर दबाव बनाया। इसका फायदा उसे 9वें मिनट में मिला, जब हूलियन क्विनोनेस ने शानदार गोल कर टीम को शुरुआती बढ़त दिला दी। इसी के साथ उन्होंने वर्ल्ड कप 2026 का पहला गोल करने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया।
दूसरे हाफ में जीत हुई पक्की
पहले हाफ में 1-0 की बढ़त लेने के बाद भी मेक्सिको ने हमला जारी रखा। दक्षिण अफ्रीका की टीम लगातार दबाव में नजर आई। आखिरकार 67वें मिनट में अनुभवी स्ट्राइकर राउल हिमिनेज ने दूसरा गोल कर मेक्सिको की बढ़त 2-0 कर दी। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका के लिए वापसी करना मुश्किल हो गया। मैच खत्म होने तक यही स्कोर बना रहा और मेक्सिको ने जीत के साथ अपने अभियान की शुरुआत की।
गोल से ज्यादा चर्चा फाउल की रही
हालांकि मुकाबले में मेक्सिको की जीत से ज्यादा चर्चा खिलाड़ियों के व्यवहार और रेफरी के फैसलों की रही। पूरे मैच में दोनों टीमों ने मिलकर 23 फाउल किए। मेक्सिको ने 12 और दक्षिण अफ्रीका ने 11 फाउल किए। खेल के दौरान कई बार खिलाड़ियों के बीच तनाव भी देखने को मिला। रेफरी ने सख्त रुख अपनाते हुए लगातार अनुशासन बनाए रखने की कोशिश की।
दक्षिण अफ्रीका पर टूटा रेफरी का कहर
मैच का पहला रेड कार्ड 50वें मिनट में दक्षिण अफ्रीका के मिडफील्डर याया सितहोले को दिखाया गया। इसके बाद 84वें मिनट में थेम्बा ज्वाने भी रेड कार्ड देखकर मैदान से बाहर हो गए। इससे दक्षिण अफ्रीका की टीम को 9 खिलाड़ियों के साथ मुकाबला पूरा करना पड़ा। खिलाड़ियों की संख्या कम होने से टीम की मुश्किलें और बढ़ गईं।
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पहले ही मैच में बन गया बड़ा रिकॉर्ड
इंजरी टाइम में मेक्सिको के डिफेंडर सेजार मॉन्टेस को भी रेड कार्ड दिखाया गया। इस तरह मुकाबले में कुल 3 खिलाड़ियों को मैदान छोड़ना पड़ा। वर्ल्ड कप इतिहास में उद्घाटन मुकाबले में इतने रेड कार्ड पहले कभी नहीं दिखाए गए थे। यही वजह है कि मेक्सिको की जीत के साथ-साथ यह मैच रेड कार्डों के रिकॉर्ड और रेफरी की सख्ती के लिए भी लंबे समय तक याद रखा जाएगा।