अगर आप गांव में रहते हैं और मनरेगा के तहत काम करते हैं, तो ये खबर आपके लिए बड़ी राहत लेकर आई है। केंद्र सरकार मनरेगा योजना में बड़ा बदलाव करने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में मनरेगा के तहत मिलने वाले रोजगार के दिनों को बढ़ाने का फैसला लिया गया है। अभी तक एक साल में 100 दिन काम की गारंटी मिलती थी, जिसे अब बढ़ाकर कम से कम 125 दिन किया जाएगा। इसके लिए सरकार मनरेगा कानून में संशोधन करने की तैयारी कर रही है और नया बिल संसद के शीतकालीन सत्र में पेश हो सकता है।
रोजगार बढ़ेगा, आमदनी में होगा इजाफा
सरकार का मानना है कि काम के दिन बढ़ने से ग्रामीण मजदूरों की सालाना आमदनी में सीधा फायदा होगा। ज्यादा दिन काम मिलने से मजदूरों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और गांव से शहरों की ओर पलायन भी कम होगा। मनरेगा एक मांग आधारित योजना है, जिसमें मजदूरों को उनके गांव के पास ही काम दिया जाता है। इससे गांव की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। अगर यह संशोधन संसद से पास हो जाता है, तो देश के करोड़ों ग्रामीण परिवारों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
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विपक्ष ने रखी और बड़ी मांग
मनरेगा को लेकर विपक्ष भी सरकार पर दबाव बना रहा है। कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी ने राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि महंगाई और बेरोजगारी के कारण ग्रामीण मजदूरों की हालत खराब हो रही है। सोनिया गांधी ने मांग की कि मनरेगा में 125 नहीं, बल्कि कम से कम 150 दिन का रोजगार दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इससे गरीब परिवारों को स्थायी सहारा मिलेगा और रोजी-रोटी की समस्या कुछ हद तक हल होगी।
मजदूरी भुगतान और आधार पर सवाल
सोनिया गांधी ने सिर्फ काम के दिनों की बात नहीं की, बल्कि मजदूरी भुगतान में हो रही देरी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई मजदूरों को समय पर मजदूरी नहीं मिलती, जिससे उन्हें भारी परेशानी होती है। साथ ही उन्होंने आधार आधारित भुगतान प्रणाली को अनिवार्य करने पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि तकनीकी दिक्कतों की वजह से कई मजदूरों का पैसा अटक जाता है और वे योजना के लाभ से वंचित रह जाते हैं। कुल मिलाकर, मनरेगा में प्रस्तावित बदलाव ग्रामीण भारत के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है और अब सबकी नजर संसद के फैसले पर टिकी है।