मध्य प्रदेश में इंदौर के बाद अब महू क्षेत्र से भी दूषित पानी से फैल रही बीमारियों की गंभीर तस्वीर सामने आई है। पिछले 10 से 15 दिनों के भीतर करीब दो दर्जन लोग पीलिया जैसे संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या बच्चों की है। हालात बिगड़ते देख प्रशासन सक्रिय हो गया है और स्वास्थ्य टीमें मौके पर तैनात कर दी गई हैं।
प्रभावित इलाकों में तेजी से फैला संक्रमण
महू के पत्ती बाजार और मोती महल क्षेत्र में अचानक बीमारियों के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय जानकारी के अनुसार, बीते दो हफ्तों में कई परिवारों के बच्चे एक साथ बीमार पड़े हैं। स्कूल जाने वाले बच्चे बिस्तर पर हैं और कुछ छात्राएं परीक्षाएं तक नहीं दे सकीं। कई घरों में एक साथ चार से छह बच्चे संक्रमण से जूझ रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है।
नलों से आ रहा बदबूदार और मटमैला पानी
स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि घरों में सप्लाई हो रहा पानी मटमैला है और उसमें तेज बदबू है। लोगों का कहना है कि इसी पानी को पीने के बाद उल्टी, बुखार और पीलिया जैसे लक्षण सामने आने लगे। रहवासियों के मुताबिक, पेयजल पाइपलाइन गंदे नालों के बीच से गुजर रही है और कई जगह लीकेज के कारण नालियों का पानी सप्लाई लाइन में मिल रहा है, जिससे दूषित पानी घरों तक पहुंच रहा है।
अस्पतालों में भर्ती बच्चे, प्रशासन ने संभाला मोर्चा
मोती महल इलाके में कई छोटे बच्चों की हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि एक बुजुर्ग को गंभीर संक्रमण के चलते दूसरे शहर रेफर किया गया है। हालात सामने आते ही अधिकारियों ने क्षेत्र का दौरा किया और पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं, ताकि शुरुआती लक्षण वाले मरीजों को तुरंत इलाज मिल सके।
कलेक्टर और प्रशासन की सख्ती, स्थायी समाधान के निर्देश
बीमारियों की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी देर रात अस्पताल पहुंचे और मरीजों से मुलाकात कर इलाज की जानकारी ली। डॉक्टरों को निर्देश दिए गए कि किसी भी मरीज को इलाज में देरी न हो। साथ ही जल आपूर्ति व्यवस्था की तकनीकी जांच, दूषित सप्लाई तत्काल रोकने और वैकल्पिक पेयजल उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।