बड़े शहरों में घर खरीदने का सपना आज भारत के मिडिल क्लास के लिए एक खतरनाक जाल बनता जा रहा है. मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें इतनी ऊंची हो गई हैं कि आम आदमी के लिए घर खरीदना लगभग नामुमकिन जैसा है. फाइनेंस एक्सपर्ट सुजय यू ने साफ चेतावनी दी है कि आज के समय में बड़े शहरों में मकान खरीदना अमीर बनने का रास्ता नहीं, बल्कि खुद को बर्बादी के मुहाने पर धकेलना है. उन्होंने बताया कि ज्यादातर लोग सोचते हैं कि घर खरीदना भविष्य की सुरक्षा है, लेकिन असलियत इससे बिल्कुल उलट हो चुकी है.
घर की कीमतें आसमान पर पहुंचीं
मुंबई में 2 BHK की कीमत 2 से 2.2 करोड़ रुपये, जबकि बेंगलुरु में 1.2 से 1.4 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है. इसके मुकाबले इन शहरों में एक परिवार की सालाना कमाई सिर्फ 20 से 30 लाख रुपये होती है. यानी घर की कीमत आमदनी के 8 से 12 गुना जो पूरी दुनिया के मानकों से तीन गुना ज्यादा महंगी है. इतना बड़ा लोन लेना मतलब जिंदगी भर के लिए कर्ज और तनाव की दास्तान खुद खरीद लेना. यही नहीं, इन घरों पर होम लोन की ईएमआई इतनी भारी होती है कि आदमी अपनी कमाई का आधा पैसा सिर्फ बैंक को देता रहता है.
परिवार की कमाई का आधा हिस्सा प्रॉपर्टी में
सुजय यू के मुताबिक 2 करोड़ के फ्लैट पर 1.4 लाख रुपये से ज्यादा की ईएमआई लगती है, जो परिवार की कमाई का 50 से 70 फीसदी हिस्सा खत्म कर देती है. दुनिया भर में विशेषज्ञ मानते हैं कि ईएमआई या किराया आपकी आय के 25–30% तक ही होना चाहिए, लेकिन भारत के बड़े शहरों में ये सीमा कई गुना टूट चुकी है. इससे मीडिल क्लास इंसान अपनी आज़ादी, सेविंग, लाइफस्टाइल और इन्वेस्टमेंट की क्षमता, सब कुछ खो देता है. इससे भी बड़ा झटका ये है कि प्रॉपर्टी से रिटर्न नाम पर सिर्फ 2% किराया और पिछले एक दशक में मुंबई में कीमतों में 1% की गिरावट देखी गई है.
कर्ज के पहाड़ के नीचे दब जाएंगे सपने !
दिलचस्प बात ये है कि सुजय बताते हैं कि बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड जैसे इलाकों में युवा घर खरीदने की बजाय किराए पर रहकर बाकी पैसे SIP में निवेश कर रहे हैं और 20 साल बाद वे उन लोगों से ज्यादा अमीर बनेंगे जिन्होंने करोड़ों की प्रॉपर्टी खरीदकर खुद को ईएमआई के बोझ में जकड़ लिया यानी घर खरीदने की जिद मीडिल क्लास को अमीर नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से बेहद कमजोर बना रही है. इसलिए अगर आप भी किसी बड़े शहर में घर खरीदने की सोच रहे हैं ध्यान रखें, हर सपना पूरा करना जरूरी नहीं, कुछ सपने आपको कर्ज के पहाड़ के नीचे भी दबा सकते हैं.