मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत के लिए एक दुखद खबर सामने आई है। शिपिंग महानिदेशालय (DGS) ने पुष्टि की है कि विदेशी झंडे वाले जहाजों पर तैनात तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई है, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल है। संघर्ष के कारण समुद्री व्यापार मार्गों पर खतरा बढ़ गया है और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता गहरा गई है।
विदेशी जहाजों पर तैनात थे भारतीय नाविक
Directorate General of Shipping (DGS) के अनुसार, हाल के दिनों में खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नाविकों से जुड़ी चार अलग-अलग घटनाएं सामने आई हैं। इनमें तीन नाविकों की मौत की पुष्टि की गई है, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल होकर उपचाराधीन है। सभी नाविक विदेशी झंडे वाले व्यावसायिक जहाजों पर कार्यरत थे। क्षेत्र में बढ़ते सैन्य टकराव के कारण समुद्री सुरक्षा को लेकर हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
वैश्विक व्यापार मार्गों पर बढ़ा खतरा
मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों को भी प्रभावित किया है। तेल आपूर्ति और कंटेनर ट्रैफिक के प्रमुख समुद्री रास्ते खतरे की जद में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो वैश्विक व्यापार और कच्चे तेल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। भारतीय नाविक बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर कार्यरत हैं, ऐसे में उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है।
अबू धाबी से सुरक्षित लौटे भारतीय यात्री
इस बीच, Abu Dhabi में फंसे भारतीय यात्री सोमवार रात Kempegowda International Airport पहुंचे। यात्रियों ने बताया कि मिसाइल हमले की आशंका के बीच वे लगातार भय और अनिश्चितता के माहौल में रह रहे थे। सुरक्षित भारत लौटने पर उन्होंने एयरलाइन और संबंधित एजेंसियों का आभार जताया, जिन्होंने उनके ठहरने और वापसी की व्यवस्था की।
प्रत्यक्षदर्शी ने बयां किया खौफनाक मंजर
मंगलुरु के सौरभ शेट्टी, जो अबू धाबी में एक तेल कंपनी में कार्यरत हैं, ने उस रात का भयावह अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट पर अचानक अलार्म बजा और यात्रियों को खिड़कियों से दूर बैठने के निर्देश दिए गए। कुछ देर बाद आसमान में मिसाइल दिखाई दी, जिसे देखकर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। शेट्टी ने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे डरावना क्षण था, जब उन्हें अपनी जान का खतरा साफ महसूस हुआ।