मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल संकट की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखने लगा है, जिसका सीधा असर भारत पर भी पड़ सकता है। इसी स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी कमेटी का गठन किया है, जिसकी कमान रक्षा मंत्री के हाथों में सौंपी गई है।
संकट पर नजर रखने के लिए बनाई गई कमेटी
मिडिल ईस्ट में बिगड़ते हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप का गठन किया है। इस कमेटी की अध्यक्षता रक्षा मंत्री Rajnath Singh करेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य ऊर्जा आपूर्ति, सुरक्षा और आर्थिक प्रभावों पर नजर रखना है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
कई बड़े मंत्री होंगे शामिल
इस हाई-लेवल कमेटी में गृह मंत्री Amit Shah, वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman और पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri सहित कई अहम मंत्री शामिल किए गए हैं। यह टीम लगातार हालात की समीक्षा करेगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत फैसले लेगी।
तेल संकट से निपटने के लिए बड़े फैसले
सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है। पेट्रोल पर 3 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी शून्य कर दी गई है। वहीं, डीजल के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लागू किया गया है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर भी नई टैक्स व्यवस्था लागू की गई है, जिससे एविएशन सेक्टर को संतुलन में रखने की कोशिश की जा रही है।
कमर्शियल एलपीजी कोटा बढ़ाकर 70%
औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को प्रभावित होने से बचाने के लिए सरकार ने गैर-घरेलू एलपीजी का कोटा बढ़ाकर 70% कर दिया है। इस फैसले से छोटे और मध्यम उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद है और उत्पादन गतिविधियों में बाधा नहीं आएगी।
रणनीतिक निगरानी से पैनिक पर कंट्रोल
सरकार का मुख्य फोकस यह सुनिश्चित करना है कि देश में किसी तरह की घबराहट या अफवाह न फैले। इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप लगातार हालात पर नजर रखेगा और जरूरत पड़ने पर त्वरित फैसले लेकर सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखेगा।