वित्त मंत्रालय की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। अगर यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो रुपये की विनिमय दर पर दबाव बढ़ सकता है और महंगाई का खतरा भी बढ़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक अनिश्चितता के कारण निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे कई देशों की मुद्राओं पर असर पड़ता है। ऐसे हालात में भारतीय रुपये पर भी दबाव देखने को मिल सकता है।
तेल और गैस की कीमतों में तेजी
इस संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 9 प्रतिशत बढ़कर लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इसके साथ ही एलएनजी यानी तरलीकृत प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऊर्जा की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो इसका असर ईंधन, परिवहन और उर्वरक जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य का असर
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ईरान के आसपास बढ़े तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर यहां लंबे समय तक रुकावट बनी रहती है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे तेल आयात करने वाले देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ सकता है और कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
मजबूत आर्थिक स्थिति से मिल सकती है राहत
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की आर्थिक स्थिति फिलहाल मजबूत बनी हुई है। देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है और चालू खाते का घाटा भी नियंत्रित स्तर पर है। इसके अलावा महंगाई भी फिलहाल काबू में है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 में देश की आर्थिक वृद्धि दर लगभग 7.6 प्रतिशत रह सकती है। सरकार को उम्मीद है कि मजबूत घरेलू मांग और बढ़ते व्यापारिक समझौते भविष्य में भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में मदद करेंगे।