मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब हवाई यात्रा पर साफ दिख रहा है। कई फ्लाइट्स रद्द हो रही हैं, रूट बदले जा रहे हैं और हजारों यात्री दुबई, ईरान और आसपास के देशों में फंस गए हैं। लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि ऐसे हालात में ट्रैवल इंश्योरेंस काम आएगा या नहीं। टिकट दोबारा बुक करने का खर्च कौन उठाएगा और होटल में रुकने का पैसा कौन देगा, इसे लेकर असमंजस बना हुआ है।
कब मिलेगा क्लेम, कब नहीं
ट्रैवल इंश्योरेंस का फायदा इस बात पर निर्भर करता है कि फ्लाइट रुकावट की वजह क्या है और पॉलिसी कब खरीदी गई थी। अगर एयरस्पेस अचानक बंद हो जाए या सुरक्षा कारणों से उड़ानें रोकी जाएं, तो यात्रा में देरी या रुकावट के तहत क्लेम मिल सकता है। लेकिन शर्त यह है कि इंश्योरेंस घटना से पहले लिया गया हो। अगर पॉलिसी बाद में खरीदी गई है, तो क्लेम मिलने की संभावना कम हो जाती है।
वॉर एक्सक्लूजन क्लॉज क्या है
ज्यादातर ट्रैवल पॉलिसियों में वॉर एक्सक्लूजन क्लॉज होता है। इसका मतलब है कि युद्ध, सशस्त्र संघर्ष या सैन्य कार्रवाई से सीधे हुए नुकसान को कवर नहीं किया जाता। अगर नुकसान सीधे युद्ध से जुड़ा है तो कंपनी जिम्मेदारी नहीं लेती। हालांकि अचानक एयरस्पेस बंद होने या सावधानी के तौर पर रूट बदलने जैसे मामलों में स्थिति हर कंपनी की शर्तों पर निर्भर करती है। इसलिए पॉलिसी की बारीक शर्तें पढ़ना बहुत जरूरी है।
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यूएई और अबू धाबी की मदद
यूएई ने फंसे यात्रियों के लिए इमरजेंसी सपोर्ट योजना शुरू की है। इसके तहत ठहरने, खाने और दोबारा टिकट बुकिंग का खर्च उठाया जा रहा है। हजारों यात्रियों के लिए अस्थायी व्यवस्था की गई है। अबू धाबी में होटल प्रबंधन को निर्देश दिया गया है कि जिन यात्रियों की यात्रा रुकी है, उनका स्टे बढ़ाया जाए और अतिरिक्त खर्च स्थानीय प्रशासन वहन करेगा। इससे यात्रियों को कुछ राहत मिली है।
सरकारी सलाह का रखें ध्यान
यात्रा से पहले सरकारी ट्रैवल एडवाइजरी जरूर देखें। अगर कोई व्यक्ति सरकारी चेतावनी के बावजूद यात्रा करता है, तो इंश्योरेंस कंपनी क्लेम देने से मना कर सकती है। कई पॉलिसियों में युद्ध से जुड़े मेडिकल खर्च या सामान के नुकसान को भी बाहर रखा जाता है। इसलिए यात्रा से पहले पॉलिसी में शामिल और बाहर रखी गई शर्तों को समझना जरूरी है।
यात्रियों के लिए जरूरी सुझाव
ऐसे हालात में शांत रहना और आधिकारिक सूचना पर भरोसा करना जरूरी है। इंश्योरेंस पॉलिसी पहले से लेना और उसकी सीमा समझना समझदारी है। टिकट, होटल और जरूरी दस्तावेज संभालकर रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर क्लेम किया जा सके। सही जानकारी और तैयारी से मुश्किल हालात में भी नुकसान कम किया जा सकता है।