मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का असर अब भारत के बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। मुंबई के पास स्थित वाशी की एपीएमसी फल मंडी में इन दिनों हालात बदले हुए हैं। खाड़ी देशों को भेजे जाने वाले फलों का निर्यात लगभग रुक गया है। इसका नतीजा यह हुआ कि जो फल विदेश भेजे जाने थे, वही अब स्थानीय बाजार में आ रहे हैं। अचानक बढ़ी सप्लाई के कारण मंडी में कीमतें तेजी से गिर गई हैं और व्यापारियों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है।
रमजान में रहती थी ज्यादा मांग
फल व्यापारियों का कहना है कि हर साल रमजान के दौरान खाड़ी देशों में भारतीय फलों की मांग काफी बढ़ जाती है। इस समय तरबूज, पपीता, खरबूजा और अंगूर जैसे फलों की बड़ी मात्रा निर्यात की जाती है। लेकिन इस बार क्षेत्र में चल रहे तनाव और जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण निर्यात लगभग ठप हो गया है। यही वजह है कि बाजार में अचानक माल की मात्रा बढ़ गई है और कीमतों में गिरावट शुरू हो गई है।
कीमतों में आई भारी गिरावट
वाशी की फल मंडी में कई फलों के दाम तेजी से नीचे आ गए हैं। तरबूज जो पहले थोक बाजार में करीब 30 से 35 रुपये प्रति किलो बिकता था, अब सिर्फ 8 से 10 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। पपीता भी पहले की तुलना में काफी सस्ता हो गया है। वहीं अंगूर के 9 किलो के कैरेट की कीमत जो पहले 1500 से 1600 रुपये तक थी, अब घटकर लगभग 500 से 600 रुपये रह गई है। इस गिरावट से व्यापारियों को काफी नुकसान हो रहा है।
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मंडी में बढ़ी माल की मात्रा
व्यापारियों के अनुसार वाशी मंडी में रोजाना बड़ी मात्रा में फल पहुंचते हैं। सामान्य दिनों में यहां लगभग 2000 टन फल आते थे, लेकिन अब निर्यात रुकने के कारण इससे भी ज्यादा माल आने लगा है। मांग कम होने की वजह से कई बार फल बिक नहीं पाते। इससे व्यापारियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
सड़ने लगे फल, बढ़ी चिंता
जब फल समय पर नहीं बिकते तो वे जल्दी खराब होने लगते हैं। मंडी में कई जगह सड़े हुए फलों के ढेर दिखाई देने लगे हैं। कई व्यापारियों को मजबूरी में खराब फल फेंकने पड़ रहे हैं। इससे न सिर्फ व्यापारियों को नुकसान हो रहा है बल्कि किसानों की मेहनत भी बेकार जा रही है।
व्यापारी और किसान मांग रहे मदद
इस स्थिति को देखते हुए व्यापारियों और किसानों ने सरकार से मदद की मांग की है। उनका कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो नुकसान और बढ़ सकता है। व्यापारियों का सुझाव है कि सरकार को निर्यात के लिए नए रास्ते तलाशने चाहिए या राहत योजना शुरू करनी चाहिए, ताकि किसानों और व्यापारियों को इस संकट से कुछ राहत मिल सके।