मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब बेहद खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। हालिया हमलों में सैन्य ठिकानों के साथ-साथ परमाणु सुविधाएं भी निशाने पर आ गई हैं, जिससे पूरी दुनिया में चिंता बढ़ गई है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते हमलों ने यह आशंका पैदा कर दी है कि अगर हालात और बिगड़े, तो यह टकराव परमाणु संकट में बदल सकता है। फिलहाल युद्ध पारंपरिक है, लेकिन खतरे की आहट साफ सुनाई दे रही है।
एयरबेस पर हमले से उठी तबाही की लपटें
ईरान के खूजिस्तान प्रांत में देजफुल के पास स्थित सैन्य एयरबेस पर भारी बमबारी की गई। हमले में गोला-बारूद के बंकर निशाना बने, जिसके बाद अंदर रखे हथियारों में लगातार विस्फोट होते रहे। इस चेन रिएक्शन ने पूरे इलाके को हिला दिया। आग और धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर तक दिखाई दिया, जिससे हमले की तीव्रता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
परमाणु प्लांट बने टारगेट
इस संघर्ष का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अब परमाणु ठिकाने भी निशाने पर आ गए हैं। इजरायल के डिमोना परमाणु केंद्र और ईरान के कई न्यूक्लियर साइट्स पर हमलों की खबरें सामने आई हैं। नतांज, फोर्डो, इस्फहान और पारचिन जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों को नुकसान पहुंचा है। इन जगहों पर यूरेनियम और अन्य संवेदनशील सामग्री मौजूद होने के कारण खतरा और बढ़ गया है।
रेडिएशन लीक का मंडराता खतरा
परमाणु स्थलों पर बमबारी के कारण रेडिएशन लीक होने की आशंका ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। अगर किसी भी प्लांट से रेडियोधर्मी पदार्थ बाहर निकलता है, तो इसका असर सिर्फ स्थानीय नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है। हवा, पानी और मिट्टी के जरिए यह प्रदूषण दूर-दूर तक फैल सकता है, जिससे लाखों लोगों की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है।
अभी पारंपरिक युद्ध, लेकिन खतरा बड़ा
फिलहाल इस संघर्ष में किसी भी पक्ष ने परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं किया है, इसलिए इसे पारंपरिक युद्ध माना जा रहा है। लेकिन जिस तरह से परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है, उससे स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो हालात नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं।
क्यों डराने लगी महायुद्ध की तस्वीर?
पहले जहां केवल सैन्य ठिकानों पर हमले हो रहे थे, अब ऊर्जा और परमाणु केंद्र भी निशाने पर हैं। इससे यह संकेत मिल रहा है कि युद्ध का दायरा लगातार बढ़ रहा है। लगातार हमले, अल्टीमेटम और जवाबी कार्रवाई ने दुनिया को इस डर में डाल दिया है कि कहीं यह टकराव वैश्विक संकट में न बदल जाए।