लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत करोड़ों गणना प्रपत्र अब तक वापस नहीं लौटे हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार प्रदेश के 15.44 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 2.98 करोड़ गणना प्रपत्र असंग्रहीत या वापस नहीं आए हैं। इनमें अधिकांश शहरी क्षेत्रों से हैं, जहां स्थायी रूप से स्थानांतरित, अनुपस्थित या मृत मतदाताओं की संख्या ज्यादा पाई गई है। चुनाव आयोग ने अभियान की अवधि बढ़ाकर 31 दिसंबर तक कर दी है, ताकि छूटे हुए प्रपत्रों का सत्यापन हो सके। हालांकि 22 जिलों की स्थिति सबसे चिंताजनक सामने आई है, जहां 30 प्रतिशत से ज्यादा प्रपत्र वापस नहीं लौटे, जिससे लाखों मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कटने का खतरा मंडरा रहा है।एसआईआर अभियान 4 नवंबर से शुरू हुआ था, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना है। बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित कर रहे हैं और हस्ताक्षर लेकर वापस ले रहे हैं।
प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन पूरा
अब तक 99 प्रतिशत से ज्यादा प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन पूरा हो चुका है, लेकिन 19.31 प्रतिशत प्रपत्र असंग्रहीत श्रेणी में हैं। इनमें सर्वाधिक 8.22 प्रतिशत (लगभग 1.27 करोड़) मतदाता स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं, जो शहरों से गांवों या अन्य राज्यों में शिफ्ट हो गए। इसके अलावा अनुपस्थित मतदाता 5.5 प्रतिशत, मृतक 3 प्रतिशत और डुप्लीकेट एंट्री वाले भी शामिल हैं।सबसे बुरी स्थिति शहरी जिलों की है। गाजियाबाद में 40.23 प्रतिशत, लखनऊ में 30.86 प्रतिशत मतदाताओं के प्रपत्र वापस नहीं आए, जिससे इन जिलों में बड़े पैमाने पर नाम कटने की आशंका है। अन्य प्रभावित जिलों में प्रयागराज, कानपुर, आगरा, वाराणसी, नोएडा (गौतमबुद्ध नगर), मेरठ, गोरखपुर और सहारनपुर शामिल हैं। बुंदेलखंड के जिलों जैसे ललितपुर (9.28 प्रतिशत), हमीरपुर (11.05 प्रतिशत) और महोबा (12.74 प्रतिशत) में स्थिति बेहतर है, जहां कम नाम कटेंगे। अमरोहा, बिजनौर जैसे जिलों में भी कम असंग्रहीत प्रपत्र हैं। कुल 22 जिलों में असंग्रहीत प्रपत्रों का प्रतिशत 25 से 40 प्रतिशत तक है, जो राज्य औसत से काफी ऊपर है।
ढूंढे जाएंगे असंग्रहीत प्रपत्रों वाले मतदाता
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि असंग्रहीत प्रपत्रों वाले मतदाताओं को ढूंढने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। बीएलओ और बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। यदि कोई मतदाता जीवित और मौजूद है, तो वह फॉर्म-6 भरकर नाम जोड़ सकता है। 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष पूरे करने वाले युवा भी फॉर्म-6 से जुड़ सकते हैं। राजनीतिक दलों से अपील की गई है कि वे अपने कार्यकर्ताओं से प्रपत्र जमा करवाएं। इस अभियान से राजनीतिक मायने भी जुड़े हैं। शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर स्थानांतरित मतदाता गांवों में नाम रखना पसंद कर रहे हैं, जिससे शहरों की वोटर लिस्ट सिकुड़ रही है।
वोटर लिस्ट से छेडछाड बता रहे विरोधी
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे आगामी चुनावों में शहरी-ग्रामीण वोटिंग पैटर्न प्रभावित हो सकता है। विपक्षी दल इसे वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ बता रहे हैं, जबकि सत्ताधारी दल इसे सूची शुद्धिकरण का जरूरी कदम मानता है। मतदाताओं में दहशत का माहौल है। कई लोग कह रहे हैं कि प्रवासी मजदूर या नौकरीपेशा लोग शहर में रहते हैं, लेकिन गांव में वोट डालते हैं, इसलिए प्रपत्र नहीं भर रहे। यदि नाम कट गया तो उन्हें फॉर्म-6 भरना पड़ेगा, जिसमें दस्तावेज लगेंगे। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि प्रपत्र न भरने पर नाम कट सकता है, लेकिन सत्यापन के बाद बहाल भी किया जा सकता है।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जल्द जारी होगी
अभियान की समयसीमा पहले 4 दिसंबर, फिर 11 दिसंबर और अब 31 दिसंबर तक बढ़ाई गई है। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जल्द जारी होगी, जिसमें दावे-आपत्तियां दर्ज की जा सकेंगी। अंतिम सूची फरवरी 2026 में प्रकाशित होगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतदाताओं से अपील की है कि वे बीएलओ से संपर्क करें और प्रपत्र जरूर जमा करें। यह अभियान मतदाता सूची को सटीक बनाने के लिए है, ताकि लोकतंत्र मजबूत हो।