UP News: हस्तिनापुर को श्रापित भूमि बताकर तीसरी बार चुनाव न लड़ने के बयान को लेकर मंत्री दिनेश खटीक की सफाई सामने आई है। वह अपने इस बयान से पलट गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा है कि हस्तिनापुर उनकी कर्मभूमि है। उनका संकल्प सदैव हस्तिनापुर के लोगों की निस्वार्थ सेवा करना रहा है और आगे भी रहेगा। इस भूमि और यहां की जनता के प्रति उनकी निष्ठा अटूट है।
बयान की सोशल मीडिया पर हो रही चर्चा
दरअसल, मेरठ के खरखौदा क्षेत्र में पांची स्थित एक निजी स्कूल के 22वें वार्षिकोत्सव में मुख्य अतिथि कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम, उत्तराखंड सरकार के राज्यमंत्री श्याम सिंह सैनी और मंत्री दिनेश खटीक पहुंचे थे। इस दौरान मंत्री दिनेश शर्मा का एक बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना था। इसमें वह कहते नजर आ रहे हैं कि यह हस्तिनापुर 'शापित भूमि' है और यहां द्रोपदी का श्राप है। मुझे तीसरी बार इस 'शापित भूमि' से एमएलए नहीं बनना। मंत्री ने कहा कि मैं भागवत भी पढ़ता हूं, मैं सभी पुराण भी पढ़ता हूं, जो पढ़ेगा वह जानेगा महाभारत क्या है।
मंत्री ने सफाई दी
इस बयान के सोशल मीडिया पर आने के बाद लोगों ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दी थी। इस पर मंत्री दिनेश खटीक ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर अपने बयान को लेकर सफाई दी। उन्होंने पोस्ट में लिखा कि वह हस्तिानपुर की जनता की सेवा जारी रखेंगे।
मंत्री ने पोस्ट पर ये लिखा
मंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हस्तिनापुर की धरती पर द्रोपदी का चीरहरण महिला अत्याचार की सबसे वीभत्स घटना थी, जो महाभारत का कारण बनी। जब दुशासन द्वारा द्रोपदी का चीरहरण किया जा रहा था तो उस समय सभा में मौन रहने वालों को द्रोपदी ने श्राप दिया था, इसी कारण पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हस्तिनापुर को श्रापित भूमि माना जाता रहा है।
हस्तिनापुर मेरी कर्मभूमि है
बच्चों द्वारा मंचन के पश्चात मैंने उसी चीरहरण की वीभत्स घटना का जिक्र करते हुए हस्तिनापुर की धरती पर हुए पाप के संदर्भ में यहां की जमीन को श्रापित कहा था। मेरे द्वारा कही गई कुछ बातों को मीडिया में संदर्भ से अलग और गलत रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जो सत्य नहीं है। हस्तिनापुर मेरी कर्मभूमि है। मेरा संकल्प सदैव हस्तिनापुर के लोगों की निस्वार्थ सेवा करना रहा है और आगे भी रहेगा। इस भूमि और यहां की जनता के प्रति मेरी निष्ठा अटूट है।