बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर गुरुवार को बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति चुने गए। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन समर्थित उम्मीदवार ओली अहमद को हराया। फखरुल को 255 वोट मिले, जबकि अहमद को 88 वोट प्राप्त हुए। गुरुवार दोपहर राष्ट्रीय संसद में हुए राष्ट्रपति चुनाव में कुल 343 वैध मत डाले गए। यह चुनाव मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और रिटर्निंग अधिकारी एएमएम नासिर उद्दीन की निगरानी में आयोजित किया गया।
चीफ व्हिप के अनुसार, नए राष्ट्रपति 21 अगस्त को बंगभवन में पद की शपथ लेंगे। बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट यूएनबी की रिपोर्ट के मुताबिक, नतीजों की घोषणा करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, "मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को सबसे अधिक वोट मिले हैं, इसलिए वे विधिवत रूप से राष्ट्रपति चुने गए हैं।"
349 सांसदों में से छह ने राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं डाला
रिपोर्टों के अनुसार, मतदान के पात्र 349 सांसदों में से छह ने राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं डाला। जिन सांसदों ने मतदान नहीं किया, उनमें बीएनपी के मिर्जा अब्बास और मुस्तफा कमाल पाशा, निर्दलीय सांसद रुमीन फरहाना, जमात के सांसद गाजी नजरुल इस्लाम और इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश के सांसद ओली उल्लाह शामिल हैं।
राष्ट्रपति चुनाव 8 अक्टूबर 1991 को हुआ
यह राष्ट्रपति चुनाव पिछले साढ़े तीन दशकों से अधिक समय में पहला ऐसा चुनाव रहा, जिसमें मतदान के जरिए मुकाबला हुआ। इससे पहले 1991 से लगातार राष्ट्रपति बिना किसी प्रतिद्वंद्वी के चुने जाते रहे थे। संसद में मतदान के जरिए तय हुआ आखिरी राष्ट्रपति चुनाव 8 अक्टूबर 1991 को हुआ था।
बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन के 24 जुलाई को इस्तीफा देने के बाद, राष्ट्रीय संसद के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। बांग्लादेश के संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति पद खाली होने के 90 दिनों के भीतर नए राष्ट्रपति का चुनाव कराना जरूरी होता है।
'नंबर दो' नेता की भूमिका निभाई
फखरुल ने 15 साल से अधिक समय तक बीएनपी में प्रभावी रूप से 'नंबर दो' नेता की भूमिका निभाई। वे पार्टी के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले महासचिव रहे हैं और पार्टी के सबसे प्रमुख सार्वजनिक चेहरों में से एक माने जाते हैं। बीएनपी के कठिन दौर में जब तारिक रहमान लंदन में निर्वासन में थे और उनकी मां व पूर्व बीएनपी प्रमुख खालिदा जिया जेल, नजरबंदी या लंबे समय तक बीमारी से जूझ रही थीं,