Senior Citizen Complaint: संसार में माता-पिता और बच्चे के बीच का रिश्ता सबसे अनमोल रिश्तों में से एक है। बचपन में पेरेंट्स अपने बच्चों की हर छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करते हैं। उन्हें प्यार और सुरक्षा देते हैं और पढ़ा लिखाकर अच्छा इंसान बनाते हैं। शादी विवाह करते वह अपने मां- बाप होने का हर फर्ज पूरा करते हैं। इसी तरह वृद्धावस्था में हमें भी अपने मां- बाप का अच्छे ध्यान रखना चाहिए। लेकिन कई बार बच्चे अपने वृद्ध माता-पिता की उपेक्षा करने लगते हैं। वे अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेते हैं और उन्हें भटकने के लिए अकेला छोड़ देते हैं। ऐसी स्थिति में वृद्ध मां-बाप खुद को असहाय महसूस करते हैं। उन्हें ये नहीं पता होता है कि उनके पास कुछ ऐसे कानूनी अधिकार भी हैं। जिनकी मदद से वे अपने बच्चों को अच्छा सबक सिखा सकते हैं तो आइए जानते हैं अधिकारों के बारे में
संपत्ति वापस लेने का अधिकार
भारत में बुजुर्गों की देखभाल और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिए एक कानून बनाया गया है।जिसका नाम है “मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटिज़न्स एक्ट, 2007. इस कानून को सरकार ने बनाया ही इसी लिए है कि कोई भी बुजुर्ग अपने जीवन के आखिरी वक्त में खुद को बेसहारा और असहाय महसूस न करे। अगर कोई बुज़ुर्ग अपनी देखभाल करने की स्थिति में नहीं है चाहे वो आर्थिक रूप से कमजोर हों या शारीरिक रूप से तो उनकी देखभाल करना उनके परिवार वालों की जिम्मेदारी बनती है। अगर वारिस इन सब जिम्मेदारियों से इनकार करते हैं तो कोर्ट उनसे संपत्ति का अधिकार छीन सकता है।
मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटिजन्स एक्ट 2007
बुजुर्गों का शारीरिक और मानसिक तौर पर ध्यान रखते हुए यह कानून बनाया गया है। अगर कोई बुजुर्ग नागरिक, जिसने अपनी मेहनत से अर्जित की गई संपत्ति अपने बच्चों या वारिसों को इस भरोसे पर दे दी हो कि वो उनकी देखभाल करेंगे, लेकिन बाद में वही बच्चे या उत्तराधिकारी उनकी सेवा करना तो दूर, उन्हें नजरअंदाज करने लगें तो ऐसी स्थिति में वह न्यायलय का दरवाजा खटखटा सकता है।
वृद्ध कहां करें शिकायत
मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटिजन्स एक्ट 2007 के मुताबिक, सीनियर सिटिजन ट्राइब्यूनल यानी विशेष न्यायाधिकरण में याचिका दाखिल कर सकते हैं। इसके बाद कोर्ट संपत्ति को वापस देने के आदेश दे सकता है