क्या आपने कभी सोचा है कि कोई गांव इतना खूबसूरत और प्रसिद्ध हो कि उसे संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्था भी सम्मानित करे—but—गूगल मैप पर उसका नाम तक न हो? सुनने में अजीब जरूर लगता है, मगर ये बिल्कुल सच है। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में बसा धुड़मारास गांव एक ऐसा ही चमत्कारी उदाहरण है। पहाड़ों, नदियों और घने जंगलों की गोद में बसा यह गांव दुनियाभर के टूरिस्टों को अपनी ओर खींच रहा है। UNWTO यानी संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन ने इस गांव को “Best Tourism Village” की सूची में शामिल किया है, फिर भी गूगल मैप पर इसकी मौजूदगी नहीं है। बावजूद इसके, हजारों लोग हर साल यहां पहुंच रहे हैं और इसकी सुंदरता में खो जा रहे हैं।
गूगल मैप से गायब, लेकिन ट्रैवलर्स की पहली पसंद
गूगल मैप पर ‘धुड़मारास’ सर्च करने पर आपको कोई खास जानकारी नहीं मिलेगी, लेकिन बस्तर के इस गांव की जमीनी हकीकत इससे कहीं ज्यादा खास है। यह गांव प्राकृतिक नजारों, शांत वातावरण और पारंपरिक आदिवासी संस्कृति के लिए दुनियाभर में चर्चित होता जा रहा है।
UNWTO की बेस्ट टूरिज्म विलेज लिस्ट में शामिल
संयुक्त राष्ट्र के पर्यटन संगठन UNWTO ने धुड़मारास गांव को 2023 की Top 20 Best Tourism Villages में शामिल किया है। इस मान्यता के बाद से यहां पर्यटन गतिविधियों में बूम आया है।
कांगेर नदी की खूबसूरती और रोमांचक एक्टिविटीज
गांव के बीचों-बीच बहने वाली कांगेर नदी यहां की सबसे बड़ी आकर्षण है। इस नदी के किनारे टूरिस्ट बम्बू राफ्टिंग, कयाकिंग, ट्रेकिंग और बर्ड वॉचिंग जैसी एक्टिविटीज में हिस्सा लेते हैं। यहां का शांत, हरा-भरा वातावरण लोगों को प्रकृति के और करीब ले जाता है।
गांव के लोग खुद हैं टूरिज्म के ब्रांड एम्बेसडर
यहां के स्थानीय लोग ही गांव को टूरिस्ट फ्रेंडली बना रहे हैं। वे अपने घरों को होम स्टे में बदल चुके हैं जहां सैलानी पारंपरिक व्यंजन, रीति-रिवाज और जीवनशैली का अनुभव करते हैं। युवा गांवों में स्थानीय गाइड बनकर टूरिस्टों को आसपास की प्राकृतिक संपदा से रूबरू कराते हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार का समर्थन और विकास योजनाएं
हालांकि गूगल मैप पर गांव की लोकेशन उपलब्ध नहीं है, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने इसे इको टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में पहचान दी है। यहां बुनियादी सुविधाओं के विकास से लेकर पर्यटन को बढ़ावा देने तक कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।
तनाव मुक्त और आत्मिक सुकून देने वाला अनुभव
जो भी पर्यटक यहां पहुंचता है, वह यही कहता है कि—“यह गांव जितना दूर है गूगल मैप की नजरों से, उतना ही दूर है शहरों के शोर, तनाव और प्रदूषण से।” यहां आकर लोग खुद को फिर से खोज पाते हैं।