ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे पर्थ टेस्ट के पहले दिन ऐसा नज़ारा देखने को मिला, जिसकी उम्मीद शायद खुद इंग्लैंड को भी नहीं थी। पैट कमिंस और जॉश हेजलवुड जैसे दिग्गज गेंदबाज टीम में नहीं थे और ऑस्ट्रेलिया के तेज़ गेंदबाजी आक्रमण की सबसे बड़ी जिम्मेदारी अकेले मिचेल स्टार्क के कंधों पर थी। लेकिन स्टार्क ने ना सिर्फ इस चुनौती को स्वीकार किया, बल्कि इंग्लैंड की पूरी पहली पारी को अकेले उखाड़ फेंककर अपने 14 साल के टेस्ट करियर का सबसे ऐतिहासिक स्पेल डाल दिया। उन्होंने मात्र 12.5 ओवर गेंदबाजी करते हुए 58 रन पर 7 विकेट झटके, जो उनके टेस्ट करियर की पहली 7-विकेट वाली पारी है।
पहली ही स्पेल में इंग्लैंड की रीढ़ तोड़ी
स्टार्क ने अपने कहर की शुरुआत पहले ओवर से ही कर दी। पहली ही स्पेल में उन्होंने इंग्लैंड की रीढ़ तोड़ दी। जैक क्राउली और जो रूट जैसे बड़े बल्लेबाज बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। बेन डकेट भी स्टार्क की गति और स्विंग के सामने टिक नहीं पाए। पहले स्पेल में 6 ओवर में 17 रन देकर स्टार्क ने 3 विकेट निकाल दिए थे और इंग्लैंड की हालत तभी बेहद खराब हो चुकी थी। पिच पर उछाल थी, हवा में हल्की मूवमेंट थी और स्टार्क ने दोनों का बेहतरीन इस्तेमाल किया। उनकी लाइन और लेंथ इतनी सटीक रही कि इंग्लैंड के बल्लेबाज खुले शॉट खेलने का आत्मविश्वास ही खो बैठे।
इंग्लैंड की बल्लेबाजी बिल्कुल बिखरी
दूसरे सेशन में जैसे ही स्टार्क वापस आए, उनके सामने इंग्लैंड की बल्लेबाजी बिल्कुल बिखर गई। उन्होंने कप्तान बेन स्टोक्स को चकमा देकर बोल्ड किया, फिर अटकिंसन और जेमी स्मिथ को अपने स्पेल में समेट लिया। अंत में मार्क वुड को आउट करके इंग्लैंड की पारी 7 विकेट अकेले अपने नाम कर समाप्त कर दी। सिर्फ विकेट ही नहीं, स्टार्क की गेंदबाजी का असर ये रहा कि इंग्लैंड के 5 बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू पाए। यह ऐसा स्पेल था जो मैच के पहले ही दिन ऑस्ट्रेलिया को मजबूत स्थिति में ला चुका था।
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17वीं बार टेस्ट में 5 या उससे ज्यादा विकेट झटके
स्टार्क के करियर की बात करें तो यह उनका 17वां मौका है जब उन्होंने टेस्ट में 5 या उससे ज्यादा विकेट झटके हैं। वहीं इंग्लैंड के खिलाफ यह पांचवां मौका है जब उन्होंने 5-प्लस विकेट लिए हैं। लेकिन एक पारी में 7 विकेट लेना उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि है। 2011 में डेब्यू करने के बाद से स्टार्क ने कई बार इंग्लैंड को परेशान किया है, लेकिन यह स्पेल उनके टेस्ट सफर की सबसे यादगार गेंदबाजी में दर्ज हो चुका है। यह प्रदर्शन साबित करता है कि जब स्टार्क लय में होते हैं, तो वे अकेले ही किसी भी टीम को ध्वस्त करने की क्षमता रखते हैं।