उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च 2026 तक चलेंगी। इस बार योगी सरकार ने नकल और अनुचित साधनों पर पूरी तरह नकेल कसने का ऐलान किया है। नकल माफियाओं और नकलचियों के लिए कोई राहत नहीं है। तुरंत पकड़े जाने और सख्त सजा का प्रावधान है। परीक्षा को पूरी तरह नकल-मुक्त बनाने के लिए अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। सबसे बड़ी खास बात यह है कि पहली बार पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश के 20 परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल जैमर लगाए जा रहे हैं। ये जैमर परीक्षा हॉल में मोबाइल फोन, ब्लूटूथ डिवाइस और अन्य संचार उपकरणों के सिग्नल को पूरी तरह ब्लॉक कर देंगे।
यह व्यवस्था और भी सख्त होगी
अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि संवेदनशील जिलों में यह व्यवस्था और भी सख्त होगी। इसके अलावा सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे (वॉयस रिकॉर्डर सहित) 24 घंटे निगरानी करेंगे। कंट्रोल रूम से लाइव मॉनिटरिंग होगी, जहां गड़बड़ी की सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई होगी। उड़न दस्ते, सचल दल और एसटीएफ-एलआईयू की टीमें सक्रिय रहेंगी।
छात्रों की सख्त तलाशी होगी
18 जिले और कई विषय संवेदनशील घोषित किए गए हैं, जहां अतिरिक्त पुलिस बल और दोहरा निरीक्षण होगा। नए सुरक्षा फीचर्स वाली उत्तर पुस्तिकाएं भी नकल को मुश्किल बनाएंगी। रंग कोडिंग, स्पेशल प्रिंटिंग और हर पेज पर नंबरिंग से कॉपी बदलना असंभव हो गया है। छात्रों की सख्त तलाशी होगी (जूते-मोजे उतारने की जरूरत नहीं), लेकिन कोई छूट नहीं मिलेगी। प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स एक्ट 2024 के तहत नकल कराने या करवाने वालों को उम्रकैद तक की सजा और 1 करोड़ तक जुर्माना हो सकता है। अपर मुख्य सचिव और शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि परीक्षा की शुचिता से कोई समझौता नहीं। यह सख्ती लाखों छात्रों के भविष्य को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने का प्रयास है। नकल की जगह मेहनत और ईमानदारी से सफलता पाने का मौका अब और मजबूत हो गया है।