मध्य प्रदेश पुलिस अब 21वीं सदी की जरूरतों के मुताबिक खुद को तैयार करने जा रही है। पीएचक्यू यानी पुलिस मुख्यालय ने पुलिस ट्रेनिंग को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सदियों पुराने अंग्रेजी हुकूमत के जमाने के ट्रेनिंग सिस्टम को अलविदा कहने की तैयारी है। उसकी जगह अब आधुनिक तकनीक, मार्शल आर्ट्स, साइबर सिक्योरिटी और सोशल पुलिसिंग जैसे जरूरी पहलुओं पर आधारित ट्रेनिंग दी जाएगी। इसका मकसद है – स्मार्ट और स्ट्रॉन्ग पुलिसिंग के जरिए आम जनता को बेहतर सुरक्षा देना।
ट्रेनिंग में होगा मॉडर्न टच
राज्यभर के 8 पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों (PTS) में अब जून से नया बैच नए सिलेबस और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के साथ ट्रेन होगा। इसमें आरक्षक से लेकर डीएसपी रैंक तक के अफसर शामिल होंगे। 3,856 से अधिक नव नियुक्त पुलिसकर्मी मार्शल आर्ट्स, साइबर क्राइम, डिजास्टर मैनेजमेंट जैसे विषयों पर ट्रेनिंग लेंगे।
बदलेंगे पुराने सिस्टम
अंग्रेजों के जमाने के ट्रेनिंग मॉड्यूल अब इतिहास बनेंगे। पुलिस ट्रेनिंग विंग ने नई पॉलिसी तैयार की है जिसमें आउटडोर और इनडोर ट्रेनिंग दोनों को रिवैम्प किया गया है। अब केवल ऑनलाइन नहीं बल्कि पूरी तरह ऑफलाइन, ग्राउंड लेवल ट्रेनिंग होगी।
हर PTS में खास मार्शल आर्ट
हर ट्रेनिंग सेंटर में एक विशेष मार्शल आर्ट सिखाया जाएगा – जैसे सागर में ‘कलारिपयट्टु’ (केरल की फाइटिंग स्टाइल) और तिगरा में बंगाल का लाठी केल। इससे जवानों की कॉम्बैट स्किल्स में जबरदस्त सुधार होगा।
ट्रेनर भी होंगे हाईली स्किल्ड
PHQ ने T.O.T प्रोग्राम शुरू किया है, जिसमें नए प्रशिक्षकों की टीम तैयार की जा रही है। ADG (प्रशिक्षण) राजाबाबू सिंह खुद इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। रीवा में फिलहाल 40 ट्रेनों को DI ट्रेनिंग दी जा रही है।
सोशल पुलिसिंग पर खास फोकस
नए ट्रेनिंग सिस्टम में सोशल पुलिसिंग को भी शामिल किया गया है। यह नागरिकों से बेहतर संवाद और सहयोग को बढ़ाएगा, जिससे अपराध रोकथाम और कानून व्यवस्था दोनों में सुधार होगा।
एडीजी का बयान
“मजबूत पुलिसिंग का आधार प्रशिक्षण है। आधुनिक ट्रेनिंग से ही हम भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकते हैं।”