नई दिल्ली इस समय अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का बड़ा केंद्र बनी हुई है। ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान दुनिया के कई बड़े देशों के प्रतिनिधि भारत पहुंचे। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की। इन बैठकों को वैश्विक राजनीति और बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। दुनिया की नजर इस बात पर भी टिकी हुई है कि भारत इस मंच पर किस तरह अपनी भूमिका मजबूत करता है।
कई देशों के मंत्रियों से मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस, ईरान, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील के विदेश मंत्रियों से अलग अलग मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों और आपसी सहयोग से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। ब्रिक्स मंच पर इन मुलाकातों को भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका से भी जोड़कर देखा जा रहा है। इसके अलावा आधिकारिक समूह तस्वीर के दौरान भी कई देशों के प्रतिनिधि एक साथ नजर आए।
जयशंकर ने किया स्वागत
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत मंडपम में पहुंचने वाले विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव समेत कई देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस दौरान सदस्य देशों और पर्यवेक्षक देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। बैठक शुरू होने से पहले कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक चर्चाएं भी हुईं जिन पर दुनिया की नजर बनी हुई है।
कई मुद्दों पर होगी चर्चा
ब्रिक्स देशों की यह बैठक सिर्फ औपचारिक बातचीत तक सीमित नहीं मानी जा रही। इसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था, बहुपक्षीय सुधार, व्यापार, क्षेत्रीय संकट और विकास जैसे अहम मुद्दों पर विचार किया जाएगा। बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच इस बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय की अंतरराष्ट्रीय दिशा तय करने में ऐसे मंच बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
भारत की बढ़ती भूमिका
भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाल रहा है और इसी वजह से यह बैठक और ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह चौथी बार है जब भारत इस समूह की अध्यक्षता कर रहा है। इससे पहले भी भारत कई बार इस मंच की मेजबानी कर चुका है। भारत की कोशिश अब इस मंच पर अपनी नेतृत्व क्षमता को और मजबूत करने की मानी जा रही है।
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दुनिया की नजर आगे पर
पश्चिम एशिया से लेकर वैश्विक आर्थिक चुनौतियों तक कई मुद्दे इस समय दुनिया के सामने हैं। ऐसे में ब्रिक्स देशों की बैठकों और नेताओं की मुलाकातों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है। अब यह देखना अहम होगा कि इन बैठकों से आगे क्या नए संदेश और फैसले निकलकर सामने आते हैं और भारत इस मंच पर कितनी बड़ी भूमिका निभाता है।