प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मलेशिया दौरे के दौरान आतंकवाद को लेकर भारत की नीति को दो टूक शब्दों में दोहराया। उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए स्पष्ट किया कि भारत इस मुद्दे पर किसी तरह का समझौता नहीं करता। कुआलालंपुर में दिए गए इस बयान के साथ ही भारत–मलेशिया संबंधों को रक्षा, व्यापार और तकनीक जैसे क्षेत्रों में नई मजबूती भी मिली।
आतंकवाद पर स्पष्ट और कठोर रुख
प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद के मामले में भारत का संदेश बिल्कुल साफ है—कोई दोहरा मापदंड नहीं और किसी तरह का समझौता नहीं। उन्होंने संकेतों में यह भी जताया कि भारत अपनी सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सजग है और बीते वर्षों में आतंक के खिलाफ सख्त कदम उठा चुका है। उनके इस बयान को दक्षिण एशिया की सुरक्षा राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
मलेशिया में भव्य स्वागत और उच्चस्तरीय वार्ता
कुआलालंपुर पहुंचने पर प्रधानमंत्री का औपचारिक और गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इसके बाद दोनों देशों के नेताओं के बीच विस्तृत बातचीत हुई, जिसमें द्विपक्षीय रिश्तों को और गहरा करने पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और मलेशिया समुद्री पड़ोसी हैं और ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा मानवीय संबंध दोनों देशों को मजबूती से जोड़ते हैं।
रक्षा, सेमीकंडक्टर और व्यापार में साझेदारी
बैठकों के बाद रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने, सेमीकंडक्टर निर्माण और व्यापारिक निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। प्रधानमंत्री ने बताया कि एआई, डिजिटल तकनीक, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा जैसे सेक्टरों में भी नई पहल शुरू की जाएगी, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ मिलेगा।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर भारत का विजन
प्रधानमंत्री ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को वैश्विक विकास का नया इंजन बताते हुए कहा कि भारत क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ सहयोग को भारत की विदेश नीति का अहम हिस्सा बताया और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया।
द्विपक्षीय रिश्तों को नई दिशा
मलेशियाई नेतृत्व ने भी भारत के साथ व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने की बात कही। वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए दोनों पक्षों ने भविष्य में संयुक्त परियोजनाओं और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का संकल्प लिया।