यूरोप का छोटा सा देश नॉर्वे आज दुनिया के सबसे अमीर और खुशहाल देशों में गिना जाता है। लेकिन हमेशा से उसकी पहचान ऐसी नहीं थी। साल 1970 के दशक में उत्तरी सागर में तेल और प्राकृतिक गैस का विशाल भंडार मिलने के बाद इस देश की किस्मत पूरी तरह बदल गई। इसी ऊर्जा संपदा ने नॉर्वे को दुनिया के बड़े पेट्रोलियम निर्यातकों में शामिल कर दिया और आज वहां की अर्थव्यवस्था मजबूत समाज कल्याण मॉडल की मिसाल मानी जाती है।
मोदी का दौरा क्यों बना खास?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 मई 2026 को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पहुंचे हैं, जहां वह तीसरे भारत-नॉर्डिक सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। यह दौरा इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि 43 साल बाद भारत से किसी प्रधानमंत्री की नॉर्वे यात्रा हो रही है। ऐसे समय में यह यात्रा हो रही है जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर दुनिया चिंता में है। ऐसे माहौल में भारत और नॉर्वे के रिश्तों को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
भारत और नॉर्वे के बीच नई डील
भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के बीच व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता लागू हो चुका है। इसके तहत नॉर्वे समेत चार देशों के साथ निवेश और आर्थिक सहयोग का रास्ता खुला है। जानकारी के मुताबिक अगले 15 वर्षों में करीब 100 अरब डॉलर निवेश और लाखों रोजगार पैदा होने की संभावना जताई गई है। माना जा रहा है कि नॉर्वे की कई कंपनियां भारत में बड़े स्तर पर निवेश के अवसर तलाश सकती हैं।
क्या भारत को मिलेगा ऊर्जा सहारा?
मौजूदा समय में पश्चिम एशिया में तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर चुनौतियां बढ़ी हुई हैं। ऐसे में ऊर्जा क्षेत्र में समृद्ध नॉर्वे भारत के लिए अहम साझेदार बन सकता है। नॉर्वे दुनिया के बड़े तेल और गैस निर्यातकों में शामिल है। ऐसे में पीएम मोदी का यह दौरा सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं माना जा रहा बल्कि इसे ऊर्जा सुरक्षा के नजरिए से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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सिर्फ तेल नहीं तकनीक पर भी फोकस
इस दौरे में ऊर्जा के अलावा स्वच्छ तकनीक, ग्रीन ऊर्जा, ब्लू इकनॉमी और नई तकनीकों पर भी बातचीत होने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच कार्बन स्टोरेज, अपतटीय पवन ऊर्जा और बैटरी तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है। इससे भारत और नॉर्वे के संबंध सिर्फ व्यापार नहीं बल्कि भविष्य की तकनीकी साझेदारी तक पहुंच सकते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि ओस्लो में हुई बातचीत आने वाले समय में भारत के लिए कितने नए रास्ते खोलती है।